पटना के गांधी मैदान में 27 अक्टूबर को हुए विस्फोट और 2008 में अहमदाबाद, दिल्ली तथा जयपुर में हुए विस्फोटों में एक समानता मिली है, इन सभी विस्फोटों में लोटस ब्रांड की एनालॉग घड़ियों का इस्तेमाल किया गया है।
एनआईए ने पटना ब्लास्ट के बाद अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है। एनआईए अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि यह लोटस घड़ियां कौन और कहां बनती हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार पटना में हुए ब्लास्ट में अमानियम नाइट्रेट, पोटेसियम क्लोरेट और अमोनियम पाउडर के मिश्रण का उपयोग किया गया था। सभी बम 440 ग्राम से उपर के वजन के थे और इनके साथ एनालॉग घड़ियां टाइमर रूप में जुड़ी हुई थीं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बमों में बॉल बियरिंग और नुकीले कील का भी प्रयोग किया गया था। इन बमों में पाइप का भी उपयोग किया गया था जिसमें 39 वोल्ट की बैट्री डेटोनेटर के लिए और 1.15 वोल्ट की पेंसिल बैट्री घड़ियों के लिए इस्तेमाल हुआ था।
एक आईपीएस अफसर ने बताया कि जुलाई में बोध गया में जो विस्फोट हुए थे उसमें भी इसी तरीके के आईईडी का इस्तेमाल किया गया था। गया में जहां 2 किलो के गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया गया था वहीं पटना में पाइप का इस्तेमाल किया गया।