चीन के प्रधानमंत्री ली केचियांग ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से वादा किया है कि चीन ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे भारत के हित प्रभावित हो।
भारत के तीन दिवसीय यात्रा पर आए ली ने मंगलवार को मुखर्जी से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
इस मौके पर मुखर्जी ने कहा कि दोनों देशों से होकर गुजरने वाली नदियों को दोनों देशों के लोगों को बांटने की वजह नहीं बल्कि जुड़ने का जरिया बनना चाहिए।
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राष्ट्रपति ने तिब्बत से होकर भारत में आने वाली विवादित ब्रह्मपुत्र नदी के संदर्भ में यह बात कही।
ली से मुलाकात के दौरान प्रणब मुखर्जी ने यह भी कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे की संवेदना का ख्याल रखते हुए विश्वास का माहौल बनाना चाहिए ताकि साझा हितों का ख्याल रखा जा सके।
राष्ट्रपति ने खुशी जताई है कि ली ने पद ग्रहण करने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। उन्होंने कहा कि ली का यह कदम उनकी नजर में भारत की अहमियत को दर्शाता है।
राष्ट्रपति के मुताबिक भारत-चीन संबंध 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण मसला है। मुखर्जी ने ली से उम्मीद जताई कि ये संबंध आपसी विश्वास और भाईचारे का होगा।
इन बातों की प्रतिक्रिया में ली ने राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि चीन भारत को सामरिक साझेदार के रूप में देख रहा है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की अपार संभावनाएं ह्रैं।