भारत और चीन द्विपक्षीय वार्ता के अगले दिन चीनी प्रधानमंत्री ली केचियांग ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और ब्रह्मपुत्र नदी के प्रति भारत की अति संवेदनशीलता को भांपते हुए एक बार फिर सधा हुआ बयान दिया।
ली ने अपने भाषण की शुरुआत ‘नमस्ते भारत’ से करते हुए भरोसा दिलाया कि दोनों देश सीमा विवाद की हकीकत से भाग नहीं रहे।
बल्कि भारत और चीन के पास वह विद्वता और समझदारी है जिसकी बदौलत जटिल समस्याओं का समाधान आमने सामने बैठकर निकाल लेंगे। ली के मुताबिक वह समाधान ऐसे होंगे जो दोनों देशों को स्वीकार्य होंगे।
भारतीय हितों के खिलाफ कोई काम नहीं करेगा चीन
ली ने विश्वास जताया कि जब भारत और चीन एक स्वर में बोलेंगे तो दुनिया को उनकी बात सुननी पड़ेगी।
भारत के नामचीन व्यवसायियों के बीच ली ने चीन की एक पुरानी कहावत के जरिए भारत की अहमियत को रेखांकित किया।
ली ने कहा कि दूर रह रहे रिश्तेदार से ज्यादा भरोसेमंद नजदीक रह रहा पड़ोसी होता है। भारत और चीन के बीच मतभेदों से ज्यादा साझा हित के मुद्दे की बात करते हुए ली ने भरोसा दिलाया कि वह मतभेदों से भाग नहीं रहे।
उन्होंने खुशी जताई कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारत के अन्य नेताओं के साथ पूरी साफगोई के साथ बातचीत हुई।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने अपनी बात खुले तौर पर सामने रखी और उन्हें मिलकर सुलझाने की तत्परता दिखाई है।
कोटनीस के परिवार से मिले चीनी प्रधानमंत्री
दुनिया के प्रगतिशील देशों की आवाज बुलंद करने की वकालत करते हुए ली ने कहा कि चीन अभी भी इसी श्रेणी में आता है।
चीन और भारत प्राकृतिक सीमा से जुड़े हैं और दोनों देशों का संबंध प्राचीन समय से है। ली ने कहा कि दोनों का आपसी सहयोग इन पुराने रिश्तों में नई गरमाहट लाएगा।