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देश के पांच बच्चों में से एक में सहनशीलता की कमी

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घर व स्कूल में खेलने का समय न मिलने के चलते बच्चों में सहनशीलता की कमी आ रही है। देश भर में स्कूली बच्चों पर किए गए सर्वे में सामने आया है कि प्रति पांच में से एक बच्चे में सहनशीलता व धैर्य की कमी है।
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सहनशीलता की कमी के चलते बच्चों में चिड़चिड़ापन भी बढ़ रहा है। इसी के चलते बच्चों के शरीर में लचीलेपन की कमी हो रही है। जबकि बीएमआई (आयु व कद के आधार पर वजन) भी ठीक नहीं है।

बच्चों में हेल्थ एंड फिटनेस को लेकर सर्वे करने वाली संस्था एड्यूस्पोर्ट्स के छठे सर्वे के मुताबिक, स्कूलों में फिटनेस की स्थिति चिंताजनक हैं।

यह सर्वेक्षण 26 राज्यों के 87 शहरों में 245 स्कूलों के 7-17 आयु वर्ग के 1,48,054 बच्चों पर किया गया है। इसमें यह बात सामने निकल कर आई है स्कूल में बच्चों के खेलकूद पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
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जिन स्कूलों में दो या तीन स्पोर्ट्स पीरियड हैं, वहां के बच्चों में सहनशीलता के अलावा बीएमआई भी अच्छा है। सर्वे केसाथ 24 महीनों के दौरान 80 स्कूलों के 23,889 बच्चों (खेलकूद में भाग लेने वाले) में पाया गया कि वे अन्य बच्चों के मुकाबले सभी मानकों पर अधिक फिट हैं।

एनसीआर में लड़कों से अधिक लड़कियां स्वस्थ

दिल्ली समेत एनसीआर की लड़कियों का स्वास्थ्य लड़कों से अच्छा है। एनसीआर के 15 स्कूलों में करीब 17 हजार बच्चों पर किए गए सर्वे में सामने आया है कि 63.7 फीसदी लड़कियों का बीएमआई ठीक है तो लड़कों का बीएमआई महज 59.3 फीसदी है। दिल्ली के बच्चों में सहनशीलता कमी सभी मेट्रो शहरों के मुकाबले अधिक है।

मैथ्स की तर्ज पर खेलकूद को दें बढ़ावा
''सर्वे का आंकड़ा चौंकाने वाला है। हम पेरेंट्स व स्कूलों से मांग करते हैं कि वे मैथ्स की तर्ज पर फिजिकल एजुकेशन को बढ़ावा दें। दिन में कम से कम तीन या उससे अधिक स्पोर्ट्स एक्टिविटी के पीरियड होने चाहिए ताकि बच्चों का संपूर्ण विकास हो सके। जल्द ही सर्वे के आधार पर भारत सरकार से इस मुद्दे पर बात करते हुए मांग करेंगे कि स्कूलों में स्पोर्ट्स एक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाए।''
-सैम्युल मजुमदार, एमडी, एड्यूस्पोर्ट्स
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खास बातें

- पांच में से एक बच्चे में पर्याप्त सहनशीलता की कमी है।
- चार में से एक बच्चे में वांछित लचीलापन की कमी है।
- पांच में से दो बच्चों का बीएमआई ठीक नहीं है।
- दस में से तीन बच्चों में दौड़ने की क्षमता नहीं है।
- पांच में से दो बच्चों में शरीर के ऊपरी हिस्से की क्षमता उपयुक्त नहीं है।
- दो में से एक बच्चे में शरीर के निचले हिस्से की क्षमता उपयुक्त नहीं है।
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