छत्तीसगढ़ का चुनाव दो सीटों को छोड़कर बीजेपी के पक्ष में लगभग एकतरफा रहा है। कांग्रेस राज्य की दो सीटों महासंमुद और दुर्ग में लड़ाई में थी। महासंमुद की रोचक लड़ाई में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपनी सीट करीब 1000 वोटों से हार गए हैं।
दुर्ग में भारतीय जनता पार्टी की सरोज पांडे को ताम्रध्वज साहू ने हरा दिया है। साहू मतों के गोलबंद होने से भाजपा ने यह सीट 1984 के बाद पहली बार खोई है। प्रदेश कांग्रेस में उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी चरणदास महंत महज 5 हजार वोटों से हार गए हैं। यदि चरणदास महंत को अंतरकलह का सामना नहीं करना पड़ता तो वह जीत सकते थे। कांग्रेस के चरणदास महंत ही कोरबा से अकेले सांसद थे। दो विधायक अजीत जोगी के समर्थक हैं। एक तो उनका बेटा ही है। कांग्रेस छत्तीसगढ़ में करीब चार-पांच सीटें जीतने की स्थिति में थी।
भाजपा के रमेश बैस ने लगातार सातवीं बार लोकसभा चुनाव जीता है। भाजपा पूरी 11 विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही थी। विधानसभा चुनावों में यह साफ देखा गया था कि भाजपा के विधायक बड़ी संख्या में चुनाव हार गए थे। वह सत्ता में आ सकी थी तो नए चेहरों के कारण।
विधानसभा चुनाव 2013 में भाजपा ने 90 में से 49 सीटें जीती हैं, लेकिन भाजपा के मतों में केवल 0.77 फीसदी इजाफा हुआ। छत्तीसगढ़ में हिंदुत्व की कोई लहर भी दिखाई नहीं दी।
अजीत जोगी कोरबा से टिकट मांग रहे थे, वहां से चरणदास महंत सांसद रहे हैं। चरणदास महंत का टिकट कोरबा से काटना संभव नहीं था। मोदी के सहयोग के बिना महंत का चुनाव जीतना भी बड़ा मुश्किल था। मरवाही और तनाखार की दो विधानसभाएं जोगी के प्रभाववाली हैं।