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डीडीसीए:नोटिस के जवाब में कीर्ति के पुराने तेवर बरकरार

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डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार मामले में ना तो निलंबित सांसद कीर्ति आजाद के सुर में नरमी आई है और न ही भाजपा आलाकमान का रुख नरम हुआ है। बृहस्पतिवार को पार्टी की ओर से भेजे गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में कीर्ति ने एक बार फिर कहा है कि डीडीसीए भाजपा का मामला नहीं है।
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ऐसे में इस मामले में बोलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई किया जाना गलत है। कीर्ति ने अपने जवाब में अपने प्रेस कांफ्रेंस से संबंधित 5 सीडी पेश करते हुए दावा किया कि उन्होंने न तो कभी वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम लिया और न ही किसी भी स्थिति में पार्टी लाइन का उल्लंघन ही किया है।

गौरतलब है कि निलंबन की कार्रवाई पर कीर्ति के जवाब से असंतुष्ट पार्टी आलाकमान ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब देने के लिए कहा था। कीर्ति ने नोटिस मिलने के अगले ही दिन पुराने तेवर बरकरार रखते हुए भाजपा के ही वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से तैयार जवाब पार्टी महासचिव अरुण सिंह को सौंप दिया।
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जल्द हो सकता है कि कीर्ति के भविष्य का फैसला

आलाकमान पहले से ही कीर्ति के जवाब से असंतुष्ट है। चूंकि कीर्ति एक बार फिर अपने पुराने स्टैंड पर अड़े हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आलाकमान उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने का फैसला कर सकता है। तीन पन्ने के जवाब में कीर्ति ने कहा है कि डीडीसीए एक निजी संस्था है, जिसका भाजपा से कोई लेना देना नहीं है।

ऐसे में इस संस्था के खिलाफ बोलना पार्टी लाइन के खिलाफ जाना नहीं है। कीर्ति ने आलाकमान की ओर से निलंबन की कार्रवाई के बाद मीडिया के समक्ष रखे गए 5 अवसरों की सीडी भी सौंपते हुए दावा किया कि उन्होंने इस दौरान एक बार भी वित्त मंत्री का नाम नहीं लिया।

गौरतलब है कि विवाद अध्यक्ष अमित शाह ने कीर्ति को प्रेस कांफ्रेंस करने से मना किया था। इसके बाद भी कीर्ति ने कई बार मीडिया से बातचीत कर डीडीसीए में घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की। यही कारण है कि पार्टी ने उन्हें निलंबित करने के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि कीर्ति के प्रति आलाकमान का नरम रुख अपनाया जाना संभव नहीं दिख रहा। जल्द ही उन्हें पार्टी से बर्खास्त किए जाने का निर्णय लिया जा सकता है।
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