लखीमपुर खीरी में सिंगाही के गांव खैरीगढ़ से शनिवार रात अगवा की गई तीन बहनों के अपहरणकर्ताओं ने पुलिस के चेहरे पर कालिख पोत दी। खुद मुख्यमंत्री ने सूबे के पुलिस महकमे के सबसे आला अफसर डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह को अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार कर तीनों बहनों की सकुशल वापसी कराने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद वे मुक्त हो पाईं फिरौती की रकम देकर।
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लड़कियों के अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटने के बाद पुलिस की नाकामी की कहानी और साफ हुई। अपहरणकर्ताओं ने उन्हें उनके गांव से 10 से 20 किमी दायरे में ही रखा। इस बीच वे लगातार फोन पर लड़कियों के परिवार वालों से संपर्क भी करते रहे। इसके अलावा लड़कियों ने अलग-अलग जगह अपनी चप्पलें गिराकर अपना सुराग छोड़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस इसका कोई फायदा नहीं उठा पाई।
वह भी तब जबकि लड़कियों को तलाशने में खुद डीआईजी और एसपी के साथ चार सीओ, 10 थानों की पुलिस, पीएसी, एसटीएफ, एसएसबी, सर्विलांस और साइबर एक्सपर्ट की टीमें भी लगी थीं। पुलिस के आला अधिकारी लड़कियों की जल्द बरामदगी का दावा करते रहे और बदमाश फिरौती की रकम लेकर आसानी से फरार हो गए।
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पांच लाख रुपए और 2 लीटर पेट्रोल की फिरौती
लड़कियों को छुड़ाने गए उनके रिश्ते के मामा प्रताप और पड़ोसी नीलेश ने साफ-साफ बताया कि लड़कियों को बदमाशों को पांच लाख रुपये और दो लीटर पेट्रोल देकर मुक्त कराया गया है। प्रताप और नीलेश के मुताबिक सोमवार रात करीब नौ बजे वे फिरौती की रकम से भरा बैग लेकर बदमाशों के बताए गए स्थान भैरमपुर के पास अमुवा पुल पर पहुंचे।
वहां एक बाइक पर सवार दो बदमाश मिले। बदमाशों ने फिरौती की रकम मांगी तो उन्होंने तीनों बहनों को दिखाने के लिए कहा। इस पर बदमाश उन्हें रेलवे क्रासिंग के पास ले गए। उसके बाद गन्ने के खेत और गांव को पार करते हुए जंगल में ही आम के बाग के पास पहुंचे। वहां से करीब चार किमी दूर चलने के बाद बदमाशों ने रुकने को कहा और अपने साथियों को बुलाया।
पैसा और दो लीटर पेट्रोल लेने के बाद बदमाश तीनों बहनों उपमा, रोहिणी और संतोषी को ले आए। प्रताप और नीलेश ने बताया कि बदमाशों को दिए गए नोट एक हजार और पांच सौ के थे। सभी के सीरियल नंबर पहले से लिख लिए गए थे।
प्रताप और नीलेश तीनों बहनों को एक ही बाइक पर बैठाकर वहां से लौटे। बदमाश उन्हें रास्ता बताने के लिए रेलवे क्रासिंग तक आए, उसके बाद कुछ राउंड गोलियां चलाकर लौट गए। जब ये लोग बेलरायां चीनी मिल के पास पहुंचे तो पुलिस की जीप आती हुई दिखाई पड़ी। उसके बाद वे लोग घर चले आए।
'तुम तो मेरी बहन जैसी हो...'
खैरीगढ़ से अगवा की गईं तीनों लड़कियों के साथ बदमाशों ने कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया। फिरौती की रकम मिलने के बाद बदमाशों ने तीनों बहनों के पैर छुए और कहा कि तुमसे हमारी कोई रंजिश नहीं है।
हम तो तुम्हारे पिता को अगवा करने आए थे लेकिन मजबूरी में तुम लोगों को अगवा करना पड़ा। तुम तीनों हमारी बहनों के समान हो। अपहरणकर्ताओं से छूट कर आईं तीनों बहनों ने यह बात मीडिया, पुलिस और परिवारीजनों को बताई।
लेकिन भागने पर पीटा...
रविवार की रात उपमा, रोहिणी और संतोषी ने भागने का प्रयास किया लेकिन बदमाशों को इसका पता चल गया। इसके बाद बदमाशों ने तीनों बहनों की पिटाई कर दी।
सबसे ज्यादा भागने की योजना बनाने वाली सबसे बड़ी बहन उपमा को पीटा। इसके बाद डरी सहमी लड़कियों की हिम्मत पस्त हो गई। उसके बाद किसी ने भागने की कोशिश नहीं की।
सर्च अभियान जारी है..
एसपी अखिलेश चौरसिया ने मंगलवार को परिवार वालों के पांच लाख की फिरौती देकर लड़कियों को छुड़ाने को गलत करार दिया लेकिन लड़कियां कैसे छूटकर आईं इस पर कुछ नहीं बोले। कहा, पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ को हिरासत में लिया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। जल्द मामले का खुलासा किया जाएगा।
एक बार खाना, एक कंबल में काटी रात
सिंगाही के गांव खैरीगढ़ से शनिवार की रात अगवा की गईं बहनों के सोमवार रात घर लौटने के बाद कोल्हू मालिक रामबली गुप्ता के घर पर लोगों का तांता लग गया। लोगों ने युवतियों से बदमाशों के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास भी किया।
48 घंटे तक अपहर्ताओं के चंगुल में रहने के बाद घर लौटीं लड़कियों ने बताया कि उन्हें खाने के नाम पर सिर्फ एक बार घर की बनी सब्जी और मोटी रोटी दी गई।
कड़ाके की ठंड में हल्के कंबल के सहारे एक पेड़ के नीचे तीनों बहनों ने दो दिन गुजारे। इस दौरान अपहर्ताओं ने तीनों बहनों को पीटा भी। मेडिकल की छात्रा उपमा की सबसे अधिक पिटाई की। नंगे पैर जंगल में रहने के कारण तीनों के पैरों में कांटे भी चुभे हुए हैं।
अमर उजाला से बातचीत में उपमा, रोहिणी और संतोषी ने बताया कि उनको अगवा करने के बाद बदमाश बाइक पर बैठाकर जंगल में ले गए। अपहरण के बाद बदमाशों ने उनकी आंखों में काली पट्टी बांध दी थी। सभी छह बदमाश मंकी कैप से अपना पूरा चेहरा ढके हुए थे।
इसके अलावा वे ट्रैक सूट पहने थे। आंखों के अलावा उनका कोई भी अंग दिखाई नहीं दे रहा था। बदमाशों ने घनी झाड़ियों के बीच से रास्ता बनाया और उन्हें रेलवे लाइन के किनारे रखा। जहां वे रुके थे वहां ट्रेन के गुजरने की आवाज आती थी।
अपहरणकर्ताओं को गांव की पूरी जानकारी मिल रही थी और वह छह घंटे पर ठिकाना बदल रहे थे। बदमाशों ने रविवार रात को घर की बनी मोटी रोटी और सब्जी खिलाई थी। इसके बाद न खाना दिया न ही पानी।
उपमा ने बताया कि बदमाश उनके पिता रामबली को फिरौती देने के लिए बुला रहे थे। उन लोगों ने उनकी बीमारी का बहाना करते हुए न आ पाने की बात कही। तब बदमाशों ने भरोसेमंद और बाइक चलाने वाले को फिरौती की रकम पहुंचाने के लिए कहा। तब उसने फिरौती के लिए प्रताप और नीलेश को फोन पर बुलवाया।
रविवार की रात ही हुआ था सौदा
सूत्रों की माने तो रविवार की रात करीब नौ बजे फोन आने पर फिरौती की बात तय हो गई थी। पहले बदमाशों ने 50 लाख, दूसरी बार 30 और तीसरी बार फोन आने पर पांच लाख की फिरौती तय की।
मां को देख फफक पड़ी बहनें
रात करीब 10 बजे जब तीनों बहनें वापस घर आई, तो वहां पर मौजूद मां को देखकर फफक कर रो पड़ीं। उनका करुण रुदन सुनकर वहां पर मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गईं।
नए गिरोह ने दिया घटना को अंजाम
पुलिस सूत्रों और ग्रामीणों की मानें तो इस घटना को किसी नए गिरोह ने अंजाम दिया है। इन लोगों ने 50 हजार के इनामी बदमाश बग्गा सिंह की तर्ज पर क्षेत्र में लूट और फिरौती से क्षेत्र में दहशत फैलाने का दुस्साहस किया।