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केजरीवाल ने दिल्ली जल बोर्ड पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

Sun, 17 Feb 2013 12:35 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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पानी के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल ने सरकार को एक बार फिर आड़े हाथ लिया। उन्होंने सोनिया विहार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट चलाने वाली कंपनी से भी पूछा है कि जब उसे पानी की आपूर्ति कम होती है, तो ज्यादा पानी कैसे बना लेता है। पानी के रिसाव के नाम पर भी लोगों को गुमराह करने का आरोप उन्होंने लगाया।
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केजरीवाल ने कहा कि 210 एमजीडी प्रतिदिन लीक होने की बात बताई जाती है, अगर इतना पानी रोज बह जाए तो दिल्ली में बाढ़ की स्थिति आ जाए और अगर ये पानी जमीन की भीतर भी चला जाए, तो वहां भी वाटर लेबल बढ़ जाए।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया कि पिछले 9 साल में 10 हजार करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार हुआ है। सोनिया विहार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को चलाने वाली कंपनी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उसे 90 एमजीडी कच्चा पानी मिलता है, तो वह कागजों पर 140 एमजीडी पानी का ट्रीटमेंट कैसे करती है? यह कोई जादू का खेल नहीं है कि कम पानी से ज्यादा पानी बन गया।
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सच्चाई यह है कि पानी तो 85-90 एमजीडी ही होता है, लेकिन कच्चे पानी को ज्यादा ट्रीटेड पानी दिखाकर पेमेंट वसूली का धंधा चलता है। पानी रिसाव के नाम पर पाइप लाइन बदलने में भी भ्रष्टाचार किया जाता है। केजरीवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश से सोनिया विहार के लिए कच्चा पानी मिलता है।

उत्तर प्रदेश जल निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, 2010 नवंबर में 72 एमजीडी पानी मिला, लेकिन सोनिया विहार में फ्रेंच कंपनी डेगरामॉंट ने 136 एमजीडी पानी बनाया। इसी तरह जनवरी में 48 एमजीडी पानी को 137 एमजीडी बना दिया गया।

मालवीय नगर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट इसी कंपनी को दिए जाने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरी कवायद में 519 करोड़ रुपये रुपये खर्च होने है और 32 हजार कनेक्शन दियए जाने है। इस हिसाब से हर घर में 1.62 लाख रुपये का बोझ जनता पर डाल दिया जाएगा।

अरविंद के आरोप जलबोर्ड ने किए खारिज
दिल्ली जल बोर्ड ने अरविंद केजरीवाल के लगाए आरोपों को निराधार ठहराते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया है। बोर्ड का तर्क है कि केजरीवाल गैर राजस्व जल का मामला उठा रहे हैं। गैर राजस्व जल, बोर्ड की ओर से उत्पादित जल और उपभोक्ताओं को भेजे गए पानी के बिलों का अंतर होता है।

जल बोर्ड का तर्क है कि बर्बाद होने वाले 22-25 प्रतिशत पानी का कुछ भाग भूमि सोख लेती है और काफी भाग बरसाती नालों में चला जाता है। जलबोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अनुबंधकर्ताओं को नांगलोई परियोजना के लिए जलापूर्ति उत्पादन पर लागत से अधिक का भुगतान कर रहा है। पानी के ट्रीटमेंट लागत जल बोर्ड को 15.43 रुपये प्रति किलो लीटर पड़ती है।
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