कांग्रेस सितारे वाकई गर्दिश में हैं। चुनावों में हो रही लगातार हार के कारण कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की साख लगातार कम हो रही है। पार्टी के कई नेता केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। कार्यकर्ताओं का भरोसा भी घट रहा है, जिसके कारण पार्टी में अफरातफरी का माहौल है।
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इन्हीं हालात में यूपीए सरकार के कार्यकाल में भारतीय प्रेस परिषद के चेयरमैन रह चुके सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मारकण्डेय काटजू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तीखी आलोचना की है।
गुरुवार को फेसबुक के अपने पन्ने पर काटजू ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों के लिए सोनिया गांधी को जमकर कोसा है। उन्होंने लिखा है, 'सोनिया के बारे में कम ही कहा जाए तो बेहतर है। यूपीए के कार्यकाल में घोटाले दर घोटाले हुए, वे भी करोड़ों के नहीं, बल्कि अरबों के।'
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फेसबुक पर पहले खूब की नेहरू की तारीफ
फेसबुक पर अतिसक्रिय जस्टिस काटजू ने लिखा कि बहुत से लोग नेहरू-गांधी परिवार के बारे में मुझसे मेरी राय मांग चुके हैं। इसलिए आज मुझे बताने दीजिए। उन्होंने लिखा कि मैं पंडित जवाहर लाल नेहरू का सम्मान करता हूं, क्योंकि वह अधुनिक दृष्टि के व्यक्ति थे। उन्होंने भारत में भारी उद्योगों की नींव रखी।
काटजू ने लिखा कि अंग्रेजों ने भारत का व्यापक रूप से औद्योगीकरण का विरोध ही किया था। नेहरू की नीतियां उद्योगों के विकास के लिए लाभकारी रहीं। नेहरू के नेतृत्व में भारत में विज्ञान और तकनीकी के संस्थानों मसलन आईआईटी के स्थापना हो सकी।
काटजू ने कहा कि नेहरू सेक्यूलर थे। उन पर भ्रष्टाचार का आरोप भी नहीं था। काटजू ने लिखा कि नेहरू में व्यक्तिगत रूप से कमियां थीं, वह किस व्यक्ति में नहीं होतीं? लेकिन मौजूदा दौर के बौने नेताओं के बरअक्स वह महान थे।
काटजू ने इंदिरा गांधी को जमकर लताड़ा
काटजू ने आगे लिखा कि कई लोग कश्मीर की समस्या के लिए नेहरू की आलोचना करते हैं। हालांकि उन्हें ये समझना चाहिए कि उस समय भारत हालिया आजाद हुआ था, हालात बहुत ही उलटपुलट थे। अतंरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव था।
जस्टिज काटजू ने नेहरू गांधी परिवार के बारे में लिखी अपनी राय में नेहरू की तो खूब तारीफ की, लेकिन इंदिरा गांधी को जमकर लताड़ा। उन्होंने राजीव गांधी, सोनियां गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी की भी तीखी आलोचना की।
काटजू ने लिखा कि मैं इदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और उनके बच्चों को तनिक भी सम्मान नहीं करता।
राजीव के फैसले को बताया मुर्खतापूर्ण
काटजू ने कहा कि इंदिरा गांधी कोई सिद्घांत नहीं था, वह सत्तालोभी थीं। जवाहर लाल नेहरू ने लोकतंत्रिक संस्थाओं को सम्मान किया, जबकि 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा चुनावी गड़बड़ियों की दोषी पाए जाने के बाद इंदिरा ने सत्ता पर कब्जा जमाए रखने की लालसा में सभी संस्थाओं मसलन संसद, न्यायपालिका और कार्यपालिका आदि को लगभग नष्ट कर दिया।
काटजू ने लिखा कि इंदिरा ने फर्जी आपातकाल लगाकार स्वतंत्रता का हनन किया, भारत की अवाम को पीड़ा दी।
काटजू ने लिखा कि जहां तक राजीव का संबंध है, 1984 में सिखों का कत्लेआम उन पर बहुत बड़ा धब्बा है। उन्हें शाहबानो मामले में कोर्ट के फैसले को रद्द करने के लिए भी माफ नहीं किया जाएगा। उन्होंने ऐसा केवल अपने मुस्लिम वोट बैंक को बचाने के लिए किया था।
काटजू ने लिखा कि शाहबानो मामले में कोर्ट ने कहा कि था मुस्लिम पति को तलाक के बाद भी बीवी को गुजारा देना होगा। काटजू ने कहा कि राजीव ने श्रीलंका में भारतीय सेना को भेजना का मुर्खतापूर्ण फैसला कर अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता ही दिखाई थी।
नेहरू, इंदिरा, राजीव के बाद सोनिया और उनके बच्चों पर निशान साधते हुए जस्टिस काटजू ने लिखा कि सोनिया के बारे में कम ही कहा जाए तो बेहतर है। यूपीए के कार्यकाल में घोटाले दर घोटाले हुए, वे भी करोड़ों के नहीं, बल्कि अरबों के। आश्चर्य होता है कि लूट के ये पैसे कहां गए?
काटजू ने लिखा कि सभी को ये पता है कि मनमोहन सिंह एक पुतला भर थे, और सत्ता की वास्तविक बागडोर सोनिया के हाथ में थी।
राहुल और प्रियंका को लगभग झिड़कने के अंदाज में जस्टिस काटजू ने लिखा कि राहुल और प्रियंका जिक्र करने के काबिल भी नहीं हैं। उनमे है ही क्या, मात्र इसके कि वे एक खानदान से जुड़े हुए हैं?