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'बदमाशों ने खिलाई दाल मखनी, सुबह-शाम पिलाते थे दूध'

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मैंने जैसे ही अपनी दुकान का शटर खोला, एक बदमाश ने मेरी कनपटी पर बंदूक लगा दी। बोला, हम मेरठ क्राइम ब्रांच से हैं, हमारे साथ चल। अगले ही पल स्कॉर्पियो का पीछे का गेट खोलकर मुझे उसमें डाल लिया। थोड़ी देर बाद गाड़ी रुकी हिसावदा गांव में।
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प्रदीप वर्मा बताते हैं कि बदमाश छह थे। उन्होंने हिसावदा में स्कॉर्पियो छोड़ दी। वह खराब नहीं हुई थी। वहां बोलेरो आ गई। सभी बदमाश मुझे लेकर उसमें बैठ गए। फिर थोड़ी दूर जाकर एक बदमाश ने मुझसे पूछा मोबाइल दे, मैंने कहा मेरा फोन दुकान में छूट गया। उन्होंने मुझसे मेरे पापा का नंबर लिया और फोन मिलाया। उनसे मेरी बात कराई और फिरौती मांगी।

मुझे नहीं पता मैं कहां था, लेकिन एक घंटा हो चुका था। इसके बाद गाड़ी दोपहर के तीन बजे तक चलती रही। मेरी आंखों पर पट्टी बांध दी। मुझे नींद की गोलियां खिला दी। मुझे होश आया, तो एक कमरे में था। वहीं  छह बदमाश मेरे साथ रहे। अगले दिन वहां राहुल खट्टा आया।
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राहुल खट्टा ने किया था अपहरण

बोला, अबे तू तो अपना भाई है, मेरे इलाके का है। उसने मुझसे पूछा कि घर में कौन कौन है। कितनी आमदनी है। भाई क्या करते हैं। इसके बाद वह चला गया। मुझे खाने में दाल मखनी और रोटी मिली।

शाम को आलू - टमाटर की सब्जी थी। हां, एक बात और। राहुल खट्टा ने पूछा चाय पीयेगा, मैंने कहा, मैं चाय नहीं पीता। तो उसने अपने साथियों से कहा, इसे दोनों टाइम दूध देना। मुझे पांचों दिन सुबह-शाम दूध दिया गया।

फिर मुझे अगले दिन वहां से ले गए। कस्बे जैसा था, पता नहीं कौन सा था। वहां भी एक मकान में रखा। पांच दिन में तीन मकान बदले। हर जगह जाने में चार से पांच घंटे लगते थे, सड़क बहुत खराब थी। हां, 28 मार्च की दोपहर तीन बजे मुझे बोलेरो से अल्टो में कर दिया।
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बिना फिरौती के छोड़ा, एक जोड़ी कपड़े भी दिए

इसके बाद इसी में चला। एक अप्रैल की शाम को फिर से राहुल खट्टा वहां आया। उसने कहा इसे छोड़ दो। रात के तीन बजे फिर से एक बड़ी गाड़ी आई, मैं देख नहीं पाया कौन सी थी। मैं जब चलने लगा तो राहुल खट्टा ने पूछा, घर कैसे जाएगा। एक बदमाश ने बताया थाना भवन से बस से छोड़ देंगे।

राहुल ने पूछा किराया है, मैंने कहा नहीं, तो एक बदमाश 100 रुपये देने लगा, राहुल ने 500 का नोट और दिया। इसके अलावा उसे एक जोड़ी कपड़े भी दिए। फिर मुझे बड़ी गाड़ी से ही रात में लाया गया। सुबह छह बजे थाना भवन पहुंचा। वहां से बस में बागपत के लिए बैठ गया।

धरना-प्रदर्शन से टेंशन में था राहुल खट्टा
प्रदीप वर्मा ने बताया राहुल खट्टा जब दूसरे दिन आया, तब बागपत में चल रहे धरना प्रदर्शन से कुछ टेंशन में था। कह रहा था, ये व्यापारी क्या कर लेंगे मेरा, देखता हूं कितना धरना करते हैं, मैं नहीं डरता। उस दिन वो मुझे गाली देकर बोल रहा था, लेकिन बाद में भइया कहकर बोलने लगा, मैं भी उसे भइया जी कहकर बोलता था।
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