फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जदयू को क्यों है एक दारोगा का इंतजार?

विज्ञापन
विज्ञापन
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को एक सीट को छोड़ महागठबंधन के 242 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। जिस एक विधानसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई वह नालंदा जिले की राजगीर सीट है। नीतीश के गृह जिले की यह सीट गठबंधन के तहत जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के खाते में गई है।
विज्ञापन


यह सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गढ़ मानी जाती है और यहां उसे चुनौती देने के लिए जदयू को एक लोकप्रिय चेहरे की तलाश थी और उसकी तलाश पूरी हुई दारोगा रवि ज्योति कुमार पर जाकर जो खुद भी चुनाव लड़ना चाह रहे थे। चूंकि बुधवार तक रवि के इस्तीफे से जुड़ी जरूरी विभागीय कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी थी। इस कारण उस दिन उनके नाम की घोषणा नहीं हो सकी। भाजपा के सत्यदेव नारायण आर्य राजगीर से 1977 से लगातार जीतते रहे हैं। जदयू के नालंदा जिला अध्यक्ष सियाशरण ठाकुर के मुताबिक पार्टी ने रवि की उम्मीदवारी तय कर दी है और इस संबंध में घोषणा भी जल्द कर दी जाएगी।

सियाशरण ने बताया, "समाज, खासकर गरीबों के प्रति रवि के लगाव और उनकी लोकप्रिय छवि को देखते हुए हमने पाया कि वही राजगीर सीट भाजपा से छीन सकते हैं।’’ इस सुरक्षित सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यदेव नारायण आर्य 1977 से कई बार जीतते रहे हैं। इस बीच हुए नौ चुनावों में आर्य केवल एक बार 1990 में हारे थे। जनसंघ के सदस्य रह चुके सत्यदेव नीतीश मंत्रिमंडल का हिस्सा भी रह चुके हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन

ईमानदार छवि

रवि अगस्त तक नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ के नगर थाना प्रभारी थे। जहां से रवि चुनाव लड़ेंगे उस क्षेत्र में तो कभी उनकी तैनाती नहीं हुई, लेकिन क्षेत्र में मलमास के समय लगने वाले प्रसिद्ध राजगीर मेले के रवि दो-तीन बार प्रभारी रहे हैं और इस दौरान अपने फैसलों से काफी लोकप्रिय हुए थे। कांग्रेस के नालंदा जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार रवि के करीबी मित्र हैं।

दिलीप बताते हैं, "करीब एक दशक पहले राजगीर मेले के दौरान रवि ने वहां चलने वाले अश्लील सिनेमा पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।" स्थानीय पत्रकार चंद्रकांत सिंह के मुताबिक युवा रवि क्षेत्र में एक ईमानदार, जाबांज और कर्मठ पुलिस अधिकारी के रूप में लोकप्रिय रहे हैं।

2010 के विधानसभा चुनाव में भी सोम प्रकाश नामक एक दारोगा नौकरी छोड़कर औरंगाबाद जिले के ओबरा सीट से चुनाव मैदान में कूदे थे। उन्होंने तब निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में जीत भी हासिल की थी। सोम प्रकाश एक बार फिर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें