पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान और भारत में वांछित आतंकी दाऊद इब्राहिम के समधी जावेद मियांदाद को वीजा देने पर सियासी घमासान मच गया है। विपक्षी दल भाजपा, शिवसेना और भाकपा ही नहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस के अंदर भी इसे लेकर विरोध के सुर तेज हो गए हैं।
वहीं सरकार ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि मियांदाद भारत की नकारात्मक सूची में शामिल नहीं हैं और पूरी कागजी कार्रवाई के बाद ही उन्हें वीजा दिया गया है। मियांदाद भारत-पाक के बीच छह जनवरी को दिल्ली में होने वाला तीसरा वनडे देखने आएंगे। मियांदाद के बेटे जुनैद ने दाऊद की बेटी महारुख से निकाह किया है।
पाक क्रिकेटर को वीजा देने को गलत फैसला करार देते हुए जगदंबिका पाल ने कहा कि ऐसा करने से भारत के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। पाल के अलावा भी पार्टी के अन्य नेता दबी आवाज में फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
वहीं भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भारत क्रिकेट से बहुत प्यार करता है, लेकिन आतंकियों से नहीं। भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने कहा कि जब भारत सरकार ने 2005 के बाद से मियांदाद को वीजा देने से इनकार कर दिया था तो अब केंद्र सरकार ने पूर्व पाक क्रिकेटर को भारत आने की अनुमति क्यों दी।
शिवसेना सांसद संजय राऊत ने कहा कि दाऊद के समधी के लिए रेड कारपेट बिछाया जा रहा है। पूरे राष्ट्र को इसका विरोध करना चाहिए। वहीं भाकपा नेता अतुल अंजान ने कहा कि केंद्र सरकार आखिर भारत के नंबर वन दुश्मन के समधी को वीजा क्यों दे रही है। उसे इसका जवाब देना चाहिए। दाऊद 1993 मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में भारत में मोस्ट वांटेड अपराधी है।
पाक आतंकी की फैक्ट्री है, जिसमें आतंकी पैदा होते हैं, जो भारत के खिलाफ काम करते हैं। भारत में कई आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहे दाऊद को पाक ने सौंपने से इन्कार कर दिया है। ऐसे में भारत को भी दाऊद के किसी संबंधी को देश में आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। -- मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा
दाऊद के समधी को वीजा देना जनभावना के प्रतिकूल है। -- जगदंबिका पाल, कांग्रेस सांसद