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जेटली 29 फरवरी को पेश करेंगे आम बजट

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वित्तमंत्री अरुण जेटली वर्ष 2016-17 के लिए बजट आगामी 29 फरवरी को पेश करेंगे। इस बात की जानकारी वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने दी है। यह वित्तमंत्री अरुण जेटली का दूसरा पूर्ण बजट होगा।
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बजट की तैयरियों पर वित्त मंत्रालय पिछली 4 जनवरी से विभिन्न वर्गों जिनमें ट्रेड यूनियनों, अर्थशास्त्रियों और कारोबारियों से विचार विमर्श कर रहा है। बजट पूर्व चर्चा से सरकार को हमेशा लाभ होता है क्योंकि वह उसे नीतियां बनाने में लाभ होता है। इस कवायद में जनता को भी शामिल करने के उद्देश्य से मंत्रालय ने उनसे बजट के सुझाव मंगाए हैं।

साथ ही बजट के प्रावधानों को अमली-जामा पहनाने के लिए मंत्रालय ने अन्य विभागों से बातचीत शुरू कर दी है। अपने दूसरे पूर्ण बजट में जेटली का फोकस आर्थिक विकास पर रहेगा जोकि ग्लोबल मंदी के कारण 7-7.5 फीसद पर आकर थम सा गया है। बजट को पूर्ण रूप देनें वाली टीम में वित्तमंत्री अरुण जेटली, वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम, नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया के अलावा अन्य अधिकारी शामिल हैं।
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जरूरत के हिसाब से बदल सकता है राजकोषीय लक्ष्य

देश के चोटी के अर्थशास्त्रियों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से कहा है कि कुछ बड़े खर्च को पूरा करने के लिए राजकोषीय लक्ष्य से थोड़ा-बहुत विचलन स्वीकार्य है। लेकिन मध्यम काल के राजकोषीय खाके में परिवर्तन नहीं किया जाए। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए बजट बनाने के सिलसिले में बुधवार को अरुण जेटली ने देश के चोटी के अर्थशास्त्रियों से मुलाकात की।

बैठक से निकलने के बाद इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान के महेद्र देव ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने इस बात से वित्त मंत्री को अवगत करा दिया है। उन्हें बताया गया है कि अगले वित्त वर्ष के दौरान सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और सैन्य कर्मियों के लिए वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) फार्मूला लागू करने के लिए सरकार को अतिरिक्त एक लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

इसकी व्यवस्था करने के लिए सरकार पूर्व निर्धारित राजकोषीय लक्ष्य से थोड़ा बहुत विचलित हो सकती है। इस बीच सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर सचिवों की एक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि आयोग की सिफारिशों को कैसे लागू किया जाए।
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