ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने रविवार को रायपुर में यह कह कर सनसनी फैला दी कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और नक्सलियों के बीच सांठगांठ है।
जयराम रमेश ने पत्रकारों से कहा कि आरएसएस और छत्तीसगढ़ प्रशासन का नक्सलियों के साथ 'अलिखित समझौता' है और इस गठजोड़ के कारण नक्सली मजबूत हो रहे हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि 30 से 40 हजार जवानों को राज्य के दक्षिण इलाकों में भेजने के बाद भी सरकार उनको रोकने में कामयाब नहीं हो पाई है।
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इस बयान पर बीजेपी की ओर से राज्य के इनचार्ज जेपी नड्डा ने कहा कि रमेश को इस दिक्कत की 'सतही जानकारी' है।
जिम्मेदार कौन?
रमेश ने कहा कि मेरे पास इस बात के सबूत नहीं हैं, लेकिन मुझे यकीन है कि आरएसएस और माओवादियों के बीच छत्तीसगढ़ में अलिखित सहमति है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के 6000 वर्ग किमी में कोई भारतीय झंडा फहरा नहीं सकता और इतने सारे सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि अबूझमाड के इलाके में जा भी नहीं सकता। अगर राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है तो कौन जिम्मेदार है?
आधारहीन थ्योरीः बीजेपी
जेपी नड्डा ने कहा कि अब जब दूसरे चरण का मतदान छत्तीसगढ़ के नक्सलरहित इलाकों में है। केंद्रीय मंत्री का बयान उनकी हताशा और परेशानी को बता रहा है। नड्डा ने कहा कि यह आरोप लगाने की आधारहीन थ्योरी है।
उन्होंने कहा कि दरबा घाटी की घटना से पहले कांग्रेस कहती थी कि माओवादियों ने युवाओं को भटका दिया है उसके बाद उन्होंने कहा कि नक्सली, आतंकवादियों से बड़ी परेशानी है। और अब वह उनको आरएसएस से जोड़ रहे हैं।