भाजपा और कांग्रेस के बीच संदिग्ध पाकिस्तानी नाव के मुद्दे पर वाकयुद्घ रुका नहीं है। मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि विपक्षी पार्टी भारत में चुनाव लड़ रही है या पाकिस्तान में।
ओडिशा के अपने पहले दौरे पर शाह ने कहा कि आतंक से निपटने के राजग सरकार के प्रयास की खामियों को खोजने की बजाय कांग्रेस को सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाना चाहिए।
भुवनेश्वर में महासंग्राम रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने सवाल किया कि मैं कांग्रेस से पूछना चाहूंगा कि वह कहां चुनाव लड़ती है, भारत या पाकिस्तान में? हाल ही में पोरबंदर के पास पाकिस्तानी नाव घुसने की घटना पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने भाजपा से इस बारे में स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद से भाजपा कांग्रेस पर आतंकवाद को लेकर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।
हमला रोकने के लिए सरकार की तारीफ
ओडिशा में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में जीत की जमीन तैयार करने में जुटे शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने किसी भी हमले को विफल करने और सीमा पार से गोलाबारी का करारा जवाब देने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह भारतीय तटरक्षकों बलों ने खुफिया सूचना के आधार पर अरब सागर में एक संदिग्ध पाकिस्तानी नाव को घेर लिया था। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि नाव में आतंकी सवार थे और उस पर भारी मात्रा में गोलाबारूद लदा था। आतंकी पोरबंदर के रास्ते भारत में घुसकर मुंबई जैसा हमला दोहराने के फिराक में थे।
हालांकि तटरक्षक बलों द्वारा घेरे जाने के बाद उन्होंने नाव में आग लगा दी, जिसके बाद वह नाव समुद्र में डूब गई।
सवाल उठाने वालों के खिलाफ प्रदर्शन भी
रक्षा मंत्रालय के दावे पर बाद कई सवाल उठे। मीडिया रिपोर्टों में ये तक कहा गया कि नाव आतंकियों के बजाय स्मगलरों की थी। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मामले पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए भी कहा।
हालांकि बाद में भाजपा ने दावे पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के खिलाफ भाजपा समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार प्रवीण स्वामी का पुतला भी फूंका गया।
स्वामी उन पत्रकारों में थे, जिन्होंने रक्षा मंत्रालय के दावों पर संदेह जताया था। सोमवार को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने तमाम सवालों को खारिज करते हुए कहा कि नाव करीब 12 घंटे से ज्यादा समय से निगरानी पर थी। जिस प्रकार नाव पर सवार लोगों ने आत्महत्या की उससे यह साफ जाहिर होता है कि वे आतंकी थे, नहीं तो ऐसी हालत में ड्रग्स ले जा रहे स्मगलर भी आत्मसमर्पण कर देते हैं।