खराब मौसम, बाढ़ व अन्य कई कारणों से फसलों की बरबादी होने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। फसल बीमा किसानों को इस नुकसान से बचाने में मदद करता है। इसमें नई योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) शामिल हुई है। यह योजना सभी राज्य सरकारों और संघ शासित क्षेत्रों के लिए स्वैच्छिक है।
अत: इस योजना में कोई भी राज्य शामिल हो सकता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने अमर उजाला संवाददाता एम. संजय से बातचीत में योजना से मिलने वाले लाभ गिनाए।
1. फसल बीमा क्या है?
फसल बीमा फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों को रक्षा प्रदान करता है। बीमा योजना के जरिये किसानों के नुकसान की भरपाई की जाती है। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (संशोधित) को रबी 2015-16 के बाद बंद कर प्रधानमंत्री बीमा योजना को लाया गया है। इन योजनाओं के तहत ज्यादा प्रीमियम भरने के बावजूद भी किसानों को नुकसान का सही मुआवजा नहीं मिल पा रहा था। इसमें बीमित प्रीमियम ज्यादा होने पर कैपिंग के कारण बीमा की मूल राशि घटा दी जाती थी। इसलिए इन्हें बंद कर दिया गया।
नई फसल बीमा योजना से किसानों को क्या लाभ हासिल होंगे?
2. नई फसल बीमा योजना से किसानों को क्या लाभ हासिल होंगे?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पुरानी सभी योजनाओं की तुलना में किसानों को सबसे कम प्रीमियम भरना होगा। फसलों के लिए खरीफ में ज्यादा से ज्यादा दो फीसदी और रबी में अधिक से अधिक 1.5 फीसदी बीमा दर रखी गई है। वहीं, सालाना बागवानी/व्यावसायिक फसल के लिए यह दर अधिकतम पांच फीसदी रखी गई है।
नई योजना के तहत किसानों को बीमित राशि की पूरी रकम के मुताबिक हर्जाना मिल सकेगा। इससे किसानों को कैपिंग की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
3. इस योजना के तहत कौन-कौन से जोखिम कवर किए गए हैं?
लगभग सारे जोखिम कवर किए गए हैं। उपज के आधार पर, बिजली गिरने, तूफान, ओला पड़ने, चक्रवात, अंधड़, बवंडर, बाढ़, जलभराव, जमीन धंसने और सूखा समेत खराब मौसम व फसलों को होने वाली बीमारियां भी इसमें शामिल की गई हैं। संरक्षित बोआई के आधार पर भी किसानों को बीमा योजना का लाभ मिलेगा।
बुआई/रोपाई के लिए खर्च करने के बावजूद अगर बीमित किसान खराब मौसम की वजह से बुआई/रोपाई नहीं कर सका, तो वह बीमित राशि के 25 फीसदी तक नुकसान का दावा कर सकेंगे। राज्य सरकार व केंद्र शासित क्षेत्र इसके लिए इलाका तय करने के साथ ही फसल भी तय करेंगे। अनाज, तिलहन, सालाना व्यावसायिक और बागवानी फसल उगाने वाले किसान बीमा करा सकते हैं। नई बीमा योजना के तय किए गए क्षेत्र में केसीसी खाता धारकों (ऋणी किसान) के लिए अनिवार्य है।
नई योजना के तहत किसान बीमा कैसे ले सकता है?
4. नई योजना के तहत किसान बीमा कैसे ले सकता है?
किसान निकटतम बैंक व तय की गई बीमा कंपनी के पास जाकर फसल बीमा करा सकते हैं। जबकि ऋणी किसानों का प्रीमियम बैंक ही बीमा कंपनी के पास भेज देता है। इस योजना के तहत बीमित राशि जिला स्तर तकनीकी समिति द्वारा किसी फसल के लिए तय वित्त पैमाने के बराबर होगी।
जल्द भुगतान करने के लिए फसल कटाई का आकलन तस्वीरें खींचकर सर्वर पर अपलोड की जाएंगी, इससे बीमा कंपनी को आंकड़े जल्द हासिल हो पाएंगे और इससे हर्जाना देने में लगने वाला वक्त काफी कम हो जाएगा।