उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक के भी हाथ से निकल जाने के बावजूद भाजपा की आंतरिक कलह दूर होने का नाम नहीं ले रही है।
संगठन को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी उठाने वाले संगठन मंत्रियों के बीच उभरे मतभेदों के चलते प्रदेश प्रभारियों के नाम घोषित नहीं हो पा रहे हैं। यह विवाद पार्टी नेतृत्व में चर्चा का विषय बना हुआ है।
लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के संगठन मंत्रियों का यह विवाद अब अध्यक्ष राजनाथ सिंह के लिए भी मुश्किल उत्पन्न करने लगा है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा के संगठन मंत्री रामलाल और सह संगठन मंत्री सौदान सिंह के बीच ठनी हुई है। हाल में राजनाथ सिंह की मौजूदगी में एक बैठक के दौरान इन दोनों में तीखी बहस भी हो गई। माना जा रहा है कि इस विवाद के चलते देर सबेर दोनों में से किसी एक का पार्टी से बाहर होना तय है।
अभी तो राजनाथ ने दोनों को आपसी तालमेल से काम करने को कहा है। दरअसल, दोनों के बीच विवाद की शुरुआत राजनाथ की नई टीम के गठन के समय से है। सौदान सिंह छत्तीसगढ़ की एक नेता को महासचिव बनवाना चाहते थे लेकिन रामलाल ने ऐतराज जता दिया। तब सौदान सिंह नाराज होकर कोप भवन में भी चले गए थे।
अब सौदान सिंह प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के लिए प्रभारी बनाने की योजना का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इसे रामलाल की पहल पर तैयार किया गया है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, महाराष्ट्र आदि राज्यों के लिए लोकसभा चुनाव के लिए प्रभारी तय कर लिए गए थे लेकिन विवाद के चलते यह योजना भी खटाई में पड़ती दिख रही है।
भाजपा में संगठन मंत्री राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिनिधि होते हैं। इनका मुख्य काम भाजपा को संघ की विचारधारा के अनुरूप आगे बढ़ाना व मजबूत करना होता है लेकिन राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के कई संगठन मंत्रियों पर पैसा लेकर टिकट बांटने से लेकर कई गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं।
इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने एक बार कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को यदि मजबूत होना है तो उसे इन संगठन मंत्रियों से निजात पा लेनी चाहिए।