जून के पहले हफ्ते में मणिपुर में एनएससीएन (के) के आतंकियों ने भारतीय सेना के काफिले पर हमला कर 18 जवानों को मार डाला। हमले के चंद दिनों बाद सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने ट्वीट कर दावा किया कि भारतीय सेना ने पड़ोसी मुल्क म्यांमार की सीमा घुसकर दो आतंकी कैंपों का नष्ट कर दिया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि भारतीय सेना ने सीमा पार हुए ऑपरेशन में 15 आतंकियों को मार गिराया। ऑपरेशन में शामिल सैनिकों की तस्वीरें भी जारी की गईं। हालांकि जब तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हुई तो उनकी विश्वसनीयता पर कांग्रेस समेत कई दलों ने सवाल उठाया।
राज्यवर्धन सिंह राठौर के दावे पर भी लगातार सवाल उठता रहा कि ऑपरेशन म्यांमार की सीमा में किया गया है? म्यांमार सरकार ने भी कहा कि भारतीय सेना ने अपनी सीमा में ही ऑपरेशन किया।
अंग्रेजी समाचार पत्र इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, उस ऑपरेशन में शामिल सैनिकों को दिए गए प्रशस्ति-पत्रों पर यकीन करें तो ऐसा लगता है कि वाकई ऑपरेशन म्यांमार की सीमा में नहीं हुआ।
ऑपरेशन में शामिल जवानों का सम्मान
उत्तर पूर्व के विद्रोहियों के खिलाफ भारतीय सेना ने 9 जून को ऑपरेशन किया था। हालांकि ऑपरेशन में शामिल आठ जवानों को दिए गए वीरता पुरस्कारों और प्रशस्ति-पत्रों में किसी भी पड़ोसी मुल्क का जिक्र नहीं है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, बल्कि प्रशस्ति पत्रों से ऐसा लगता है कि ऑपरेशन मणिपुर और नागालैंड में किसी स्थान पर किए गए थे।
जिन आठ जवानों को वीरता पुरस्कार दिया गया है, उनमें लेफ्टिनेंट कर्नल नेक्टर सांजेनबाम भी शामिल हैं। सांजेनबाम ने ही ऑपरेशन का नेतृत्व किया था और उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। सांजेनबाम ने ऑपरेशन में 6 से 8 आतंकियों को मार गिराया था। तंका कुमार लिंबू को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है, ऑपरेशन में उन्होंने भी अहम भूमिका निभाई थी।
सैनिकों को दिए गए प्रशस्ति पत्रों से ये जाहिर हो रहा है कि ऑपरेशन में लगभग दो दर्जन आतंकियों को मार गिराया गया था, हालांकि मरने वालों की स्पष्ट संख्या का उल्लेख नहीं है।
सेना के बयान में भी नहीं था म्यांमार का जिक्र
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 21 पैरा के आठ जवानों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। इन जवानों ने 9 जून के ऑपरेशन में हिस्सा लिया था, हालांकि उनके प्रशस्ति पत्रों को गोपनीय रखा गया।
सरकार का ये फैसला नया था क्योंकि इससे पहले सैनिको जब भी वीरता पुरस्कार दिया गया, उनके प्रशस्ति पत्रों को सार्वजनिक जाता रहा है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना ने औपचारिक रूप से कभी ये नहीं कहा कि उसके जवानों ने सीमा पार कोई ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद जारी किए बयान में सेना ने कहा था ऑपरेश भारत-म्यांमार सीमा के आसपास चलाया गया था और सेना ने इस संबंध में म्यांमार प्रशासन से बात भी की थी। हालांकि ऑपरेशन के बाद केंद्र सरकार में मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर से जरूर ऐसा दावा किया था।