पंजाब के गुरदासपुर में सीमापार से हुए फिदायीन हमले ने नरेंद्र मोदी सरकार को सकते में डाल दिया है। पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के जम्मू-कश्मीर की दहलीज लांघकर पंजाब में आने की इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है।
साफ संकेत हैं कि जम्मू-कश्मीर से सटे पंजाब में आतंकवाद के खतरे को भांपते हुए सुरक्षा रणनीति में व्यापक बदलाव किया जा सकता है।
आतंकवाद ग्रस्त जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर से इतर मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए इस पहले आतंकी हमले ने सरकार की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। इससे पाकिस्तान के साथ वार्ता की रणनीति पर संकट और गहराने के आसार बन गए हैं।
गुरदासपुर में फिदायीन के पाकिस्तानी होने की शुरुआती सूचना मिलते ही संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगियों के साथ इस पर चर्चा की।
सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि इसमें कोई शक नहीं कि इस हमले के बाद उसके समक्ष सियासी रास्ते में दोधारी तलवार पर चलने की स्थिति पैदा हो गई है।
एक ओर एनडीए सरकार के आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की सख्त छवि को उसे कायम रखना है तो दूसरी ओर कूटनीतिक रास्ते पर चलते हुए पाकिस्तान के साथ वार्ता का रास्ता खुले रखने की मजबूरी।