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'गोलियों की बौछार में नहीं हो सकती शांति की बात'

Mon, 25 Jan 2016 09:00 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश के नाम संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विशाल अर्थव्यवस्था बनने के कगार पर है। हालांकि दुनियाभार में मंदी का दौर चल रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। इसके बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था आगे की ओर बढ़ रही है।
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वर्ष 2015 चुनौतियों का वर्ष रहा है इस दौरान विश्व अर्थव्यवस्था में मंदी रही। वस्तु बाजारों पर असमंजस छाया रहा। संस्थागत कार्रवाई में अनिश्चितता आई। ऐसे कठिन माहौल में किसी भी राष्ट्र के लिए तरक्की करना आसान नहीं हो सकता।

भारतीय अर्थव्यवस्था को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। निवेशकों की आशंका के कारण भारत समेत अन्य उभरते बाजारों से धन वापस लिया जाने लगा जिससे भारतीय रुपए पर दबाव पड़ा। हमारा निर्यात प्रभावित हुआ। हमारे विनिर्माण क्षेत्र का अभी पूरी तरह उभरना बाकी है।
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2015 में हम प्रकृति की कृपा से भी वंचित रहे। भारत के अधिकतर हिस्सों पर भीषण सूखे का असर पड़ा जबकि अन्य हिस्से विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आ गए। मौसम के असामान्य हालात ने हमारे कृषि उत्पादन को प्रभावित किया। ग्रामीण रोजगार और आमदनी के स्तर पर बुरा असर पड़ा। हम इन्हें चुनौतियां कह सकते हैं क्योंकि हम इनसे अवगत हैं। समस्या की पहचान करना और इसके समाधान पर ध्यान देना एक श्रेष्ठ गुण है। भारत इन समस्याओं को हल करने के लिए कार्यनीतियां बना रहा है और उनका कार्यान्वयन कर रहा है।

इस वर्ष 7.3 प्रतिशत की अनुमानित विकास दर के साथ, भारत सबसे तेजी से बढ़ रही विशाल अर्थव्यवस्था बनने के मुकाम पर है। विश्व तेल कीमतों में गिरावट से बाह्य क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने और घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिली है। बीच-बीच में रुकावटों के बावजूद इस वर्ष उद्योगों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
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'सुधारों के लिए मजबूत विधान की जरूरत'

हमें सुधारों के लिए मजबूत विधान की जरूरत है। इसके लिए सबको मिलकर काम करने की जरूरत है। अच्छे विधान से ही देश के लोगों की तरक्की हो सकेगी और गरीबी काबू करने में मदद मिलेगी। सरकार ने जो किसानों के लिए फसल योजना शुरू की है उससे कर्ज में डूबे किसानों को फायदा होगा। वहीं बैंकिंग से अबतक दूर रहे लोगों के लिए जनधन जैसी योजनाएं शुरू की गयी हैं। इससे देश के लोगों को बैंकिंग से जुड़ने का मौका मिला है।

आतंकवाद उन्मादी उद्देश्यों से प्रेरित है, नफरत की अथाह गहराइयों से संचालित है, यह उन कठपुतलीबाजों द्वारा भड़काया जाता है जो निर्दोष लोगों के सामूहिक संहार के जरिए विध्वंस में लगे हुए हैं। यह बिना किसी सिद्धांत की लड़ाई है, यह एक कैंसर है जिसका इलाज तीखी छुरी से करना होगा। आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता; यह केवल बुराई है।

पाकिस्तान से रिश्तों पर राष्ट्रपति जी ने क‌हा कि गोलियों की बौछार के बीच शांति पर बात नहीं हो सकती। जितना हम पड़ोसी के निकट होंगे उतना ही आतंकवाद पर काबू पाने में उतनी ही मदद मिलेगी। आतंकवाद पर काबू पाने से दोनों देशों में समृद्धि आएगी।
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