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पीओके में पाक की ‘चुनावी चाल’ पर भारत नाराज

Wed, 03 Jun 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के गिलगित और बालटिस्तान में 8 जून को चुनाव कराने के पाकिस्तान के ऐलान पर सख्त प्रतिक्रिया जताई है। अपनी नाराजगी जताते हुए भारत का कहना है कि इन इलाकों में चुनाव का ऐलान कर पाकिस्तान वहां अपने जबरन और अवैध कब्जे पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है।
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साथ ही कहा चुनाव जैसे हथकंडे अपनाकर वह इस मामले में दुनिया को गुमराह नहीं कर सकता है। नई दिल्ली ने इन इलाकों के लोगों को राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखने और इन्हें अपने हिस्से में मिलाने के पड़ोसी मुल्क के प्रयासों पर भी चिंता जताई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि पीओके समेत संपूर्ण जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में गिलगित-बालटिस्तान एंड सेल्फ आर्डर के तहत दोनों इलाकों में चुनाव कराया जाना पाकिस्तान द्वारा भारत के हिस्से पर किए गए अवैध कब्जे पर पर्दा डालने जैसा है। उन्होंने कहा कि भारत इन दोनों इलाकों के लोगों को राजनीतिक अधिकार देने से इनकार किए जाने और इन पर कब्जा करने की पाक की कोशिशों से बेहद चिंतित है।
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उन्होंने गिलगित और बालटिस्तान के स्थानीय लोगों के इतर पाकिस्तान के संघीय मंत्री को गवर्नर बनाए जाने का जिक्र किया और कहा कि इससे भी पता चलता है कि पाकिस्तान इस भूभाग के लोगों को राजनीतिक अधिकार नहीं देना चाहती। इसके अलावा पाकिस्तान के रवैये के कारण स्थानीय लोगों को आतंकवाद, जातीय संघर्ष और कब्जा करने वाली नीतियों के कारण आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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भारत ने आरक्षित रखी हैं सीट

भारत पाकिस्तान के जबरन कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को अपना हिस्सा मानता है। भारत ने जम्मू कश्मीर राज्य विधानसभा में पीओके लिए 25 सीटें और संसद में 7 सीटें आरक्षित रखी हैं।  

दूसरी बार चुनाव
पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को प्रशासनिक तौर पर दो हिस्सों आजाद कश्मीर और गिलगित-बालटिस्तान में बांटा गया है। गिलगित-बालटिस्तान में में दूसरी बार चुनाव हो रहे हैं। यहां पहली बार 2009 में चुनाव हुए थे। इस इलाके को पहले पाकिस्तान में नॉर्दन एरिया कहा जाता था और इसका प्रशासन संघीय सरकार के तहत एक मंत्रालय चलाता था।

2009 में पाक की संघीय सरकार ने यहां एक स्वायत्त प्रांतीय व्यवस्था कायम की, जिसके तहत मुख्यमंत्री सरकार चलाता है। यहां की असेंबली में कुल 24 निर्वाचित सदस्य होते हैं। हालांकि असेंबली के पास बहुत ही सीमित अधिकार हैं।

इतिहास
वर्ष 1947 में पाकिस्तान के पख्तून कबाइलियों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला बोला था, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन शासक महाराज हरि सिंह ने भारत सरकार के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत सैन्य सहायता मांगी गई और इसके बदले में जम्मू-कश्मीर को भारत में मिलाने की बात कही गई।

भारत ने इस समझौते पर दस्तखत कर दिए। उस समय पाकिस्तान से हुई लड़ाई के बाद कश्मीर दो हिस्सों में बंट गया। कश्मीर का जो हिस्सा भारत के पास रहा वह जम्मू-कश्मीर नाम से जाना जाता है जबकि जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया वह पीओके के नाम से जाना जाता है।
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