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व्यापम: कांग्रेस के निशाने पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

Wed, 15 Jul 2015 11:16 PM IST
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली
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व्यापमं घोटाले की लपटों में अब केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान भी घिर गए हैं। कांग्रेस ने धमेंद्र प्रधान ही नहीं बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, सह सर संघचालक सुरेश सोनी और भाजपा सांसद अनिल दवे पर भी व्यापामं घोटाले के आरोपियों से फायदा उठाने और पैसे का लेन देन का आरोप लगाया है।
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पार्टी ने पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान से इस्तीफा की मांग की है। पार्टी ने दावा किया है कि व्यापमं घोटाले के आरोपियों के घर पर आयकर विभाग को छापा मारने के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले थे, जिसमें प्रधान की ओर से पैसे से लेन देन की बातों का खुलसा हुआ है।

पार्टी का कहना है कि विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में घोटाले के प्रमुख आरोपी सुधीर शर्मा से धर्मेंद्र प्रधान, प्रभात झा, और उनके बेटों तुष्मुल झा और अत्यन झा, भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल दवे व सुरेश सोनी के पैसे लेने की बातें कही है।
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प्रधानमंत्री करें बर्खास्त

साथ ही प्रधान पर सुधीर शर्मा के पैसों से हवाई यात्रा करने का भी आरोप लगाया गया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि डा सुधीर शर्मा वीएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष  थे, जहां एमबीबीएस में अधिकांश दाखिले ‘व्यापम’ के द्वारा होते थे।

आयकर विभाग ने 2011 में इनके यहां छापे मारे थे। उसके बाद आयकर विभाग ने रिपोर्ट बनाई थी। जिसमें पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान का नाम था। उन्होंने कहा कि प्रधान तत्काल इस्तीफा नहीं देते तो प्रधानमंत्री को उन्हें बर्खास्त करना चाहिए।

वहीं पार्टी ने शिवराज की भूमिका को लेकर कई तथ्यों का खुलासा किया है। सुरजेवाला ने कहा कि 23 फरवरी 2012 को मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया, कि ‘सभी फर्जी व्यापम अभ्यर्थियों के फोटोग्राफ और हस्ताक्षर की सेंट्रल फोरेंसिक साईंस लैबोरेटरी, हैदराबाद में जांच हो रही है।’
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व्हिसल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी ने हासिल की जानकारी

जबकि इसके उलट सच्चाई यह है, कि सेंट्रल फोरेंसिक साईंस लैबोरेटरी, हैदराबाद या सेंट्रल फोरेंसिक साईंस लैबोरेटरी, चंडीगढ़ को जांच के लिए इस तरह के कोई दस्तावेज़ प्राप्त ही नहीं हुए हैं।

यह जानकारी एक व्हिसल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी ने आरटीआई दाखिल करके हासिल की है। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि सेंट्रल फोरेंसिक साईंस लैबोरेटरी, हैदराबाद या सेंट्रल फोरेंसिक साईंस लैबोरेटरी चंडीगढ़ को ऐसे कोई फोटोग्राफ या हस्ताक्षर प्राप्त नहीं हुए थे, तो शिवराज सिंह चौहान विधानसभा और लोगों को झूठ बोलकर बहका क्यों रहे थे।

सुरजेवाला ने कहा कि 15 जनवरी 2014 को विधानसभा में शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं माना कि ‘व्यापम’ द्वारा की गई 1000 नियुक्तियां फर्जी थीं। लेकिन सवाल पैदा होता है कि मुख्यमंत्री ने आज तक इन 1000 फर्जी नियुक्तियों को पहचानने का कोई प्रयास क्यों नहीं किया?

इन कर्मचारियों को सेवा से हटाकर उन पर आपराधिक केस दर्ज क्यों नहीं किया गया? इन 1000 नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार लोगों को पहचान कर सजा क्यों नहीं दी गई?
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