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याकूब की फांसी पर गरमाई सियासत, सपा-एनसीपी ने जताई नाराजगी

Wed, 15 Jul 2015 11:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई
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मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने 29 अप्रैल को ही याकूब मेमन के डेथ वारंट पर दस्तखत कर दिए थे। 21 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने मेमन की याचिका खारिज कर दी थी।
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उसके बाद विशेष टाडा अदालत पर डेथ वारंट पर हस्ताक्षर किए। आगामी 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होनी है।

महाराष्ट्र सरकार मान कर चल रही है कि मेमन की याचिका खारिज हो जाएगी। इसके मद्देनजर उसने याकूब मेमन को फांसी पर लटकाने की प्रक्रिया शुरू की है।

जेल अधीक्षक का टिप्पणी से इनकार

नागपुर जेल अधीक्षक ने 30 जुलाई को याकूब को फांसी देने के बारे में कुछ भी कहने से इनकार किया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जेल प्रशासन को सजा का आदेश मिल चुका है।

महाराष्ट्र में पुणे और नागपुर सेंट्रल जेल में ही फांसी की व्यवस्था है। पिछले साल अजमल कसाब को पुणे में ही फांसी दी गई थी और अब नागपुर सेंट्रल जेल में 30 साल के लंबे अंतराल के बाद किसी को फांसी दी जाएगी।

शुरु हो गई सियासत

मुंबई को 12 मार्च 1993 को दहलाने वाले मुख्य अपराधियों में से एक याकूब मेमन को 22 साल के लंबे समय बाद 30 जुलाई को फांसी पर लटकाने का फरमान जारी हुआ है। टाडा अदालत की ओर से उसका डेथ वारंट जारी होते ही सियासत शुरू हो गई है।

एनसीपी नेता एवं वरिष्ठ वकील माजिद मेनन ने इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उधर, सपा विधायक अबू आसिम आजमी ने याकूब मेमन को बेगुनाह बताते हुए कहा कि यह सरकार की मार्केटिंग का हिस्सा है।

माजिद का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय में याकूब मेमन की सजा को लेकर पुनर्विचार याचिका (क्यूरेटिव रिट) दायर की गई है। इसके पहले सरकार ने सजा का ऐलान कर दिया है, जिसका गलत संदेश जा रहा है।

'मूल मुद्दे से भटकाना चाहती है सरकार'

माजिद ने कहा कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए और आखिरी फैसला आने तक सरकार को इंतजार करना चाहिए। महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष विधायक अबू आसिम आजमी ने कहा कि जब अजमल कसाब और अफजल गुरु को गोपनीय ढंग से फांसी दी गई, तो याकूब के फांसी की तारीख दुनिया के सामने कैसे आ गई।

उसकी इतनी गलती भी नहीं है कि उसे फांसी की सजा दी जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिये सरकार सांप्रदायिक वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रही है और मूल समस्याओं की ओर से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।

उधर, याकूब मेमन की फांसी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का पालन करेगी। नागपुर जेल प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जल्द अमल करने का आदेश दिया गया है।
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फांसी का शिवसेना ने किया समर्थन

उन्होंने कहा कि फांसी देने की जगह और तारीख में बदलाव हो सकता है। लिहाजा याकूब के परिवार को उचित समय पर सूचना दे दी जाएगी। याकूब की फांसी का शिवसेना ने भी समर्थन किया है।

शिवसेना प्रवक्ता नीलम गोन्हे ने कहा कि कोर्ट ने उसे बम धमाके  में सैकड़ों लोगों की हत्या करने का दोषी पाया है। राष्ट्रपति भी उसकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं। लिहाजा उसे कोर्ट के फैसले के तहत सजा मिलनी ही चाहिए।

मुंबई की टाडा अदालत में 1993 के बम धमाके केस की पैरवी करने वाले सरकारी वकील उज्जवल निकम ने भी याकूब मेमन को फांसी देने के फैसले की तारीफ की है।
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