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बलात्कार रोकने में सपा-बसपा सरकारें रहीं नाकाम

Sun, 08 Jun 2014 06:40 PM IST
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने में सूबे की समाजवादी सरकार ही नहीं, बल्कि खुद को उनका शुभचिंतक बताने वाली मायावती सरकार भी नाकाम रही थी।
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पिछले आठ साल में पिछड़ी जातियों की 2499 महिलाएं हैवानियत का शिकार हुई हैं। जबकि औसतन हर साल एसएसी/एसटी वर्ग की 312 महिलाएं बसपा और सपा सरकार में बलात्कार का शिकार हुई हैं।

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में मुख्यालय अपर पुलिस महानिदेशक, विशेष जांच लखनऊ ने पिछले आठ साल में पिछड़ी जाति की महिलाओं के बलात्कार के मामलों का ब्योरा दिया है।
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मायावती सरकार में भी हुई ऐसी घटनाएं

बदायूं की दो बहनों से बलात्कार और उनकी हत्या की घटना पर घिरी सपा सरकार के कार्यकाल में राज्य में आपराधिक वारदातों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बदायूं पहुंचकर मायावती का यह जताना कि उनकी सरकार में पिछड़ी जातियों की महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित थीं, गलत है।

आंकड़ों के मुताबिक बसपा सरकार (2007-2011) के पांच साल के कार्यकाल में 1650 पिछड़ी जाति की महिलाओं से जबरदस्ती हुई। जबकि 2012 और 2013 में सपा सरकार के दौर में 609 अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाएं बलात्कार का शिकार हुई हैं।

हालांकि मायावती और अखिलेश सरकार में अंतर यह है कि बसपा सरकार में बलात्कार की घटना होने पर तत्काल कार्रवाई होती थी। लेकिन सपा सरकार में राजनीतिक और सामाजिक दबाव पड़ने पर ही कोई कदम उठाया जाता है।
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अखिलेश सरकार में बढ़े मामले

बलात्कार की घटनाओं पर असंतुलित और विवादित बयानों की होड़ भी सपा सरकार में आई है, जिस पर देशभर के सभी राजनीतिक दलों और संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है।

आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल को राज्य पुलिस की ओर से भेजी गई सूचना में 2006 में पिछड़ी जाति की महिलाओं के साथ हुई बलात्कार की घटनाओं ब्यौरा भी दिया गया है। तब सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह की सरकार थी और 240 घटनाएं सामने आई थीं।

गौरतलब है कि सपा सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद एक आईटीआई के जवाब में यह साफ हो गया था कि बसपा सरकार की तुलना में अखिलेश सरकार में अपराध के मामले में बढ़ोतरी हुई। इस हकीकत से रूबरू होने के बावजूद सपा सरकार में पुलिस मुस्तैद नहीं हुई और आपराधिक वारदातें बदस्तूर जारी हैं।
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