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17 तक नहीं दिया जवाब तो गिरेगा नकवी का घर

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केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का रामपुर स्थित घर और कार्यालय खतरे में है। इनके घर को गिराने को लेकर स्थानीय प्रशासन ने एक नोटिस भेजा गया है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक नकवी के साथ-साथ करीब 300 और घरों को जिला प्रशासन ने ऐसे नोटिस भेजे हैं। इस नोटिस में प्रशासन ने सभी घरों से जुड़े मालिकाना हक के कागजात 17 जून से पहले जमा करने को कहा है।

जिला प्रशासन के मुताबिक इलाके के करीब 300 घर और 4 कॉलोनियां अवैध हैं और सरकारी जमीन पर बनी हुई हैं। इनको खाली कराने के बाद यहां जेल बनाने की योजना है। हालांकि प्रशासन के इस फैसले का स्थानीय निवासियों ने विरोध किया है।
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17 जून तक जमा कराने होंगे जरूरी कागजात

लोगों के विरोध के मद्देनजर शहर के सर्कल ऑफिसर अलय हसन ने पुलिस और जिले के दूसरे अधिकारियों के साथ मिलकर एक बैठक की। जिसमें सभी निवासियों को अपने घरों के मालिकाना हक से जुड़े कागजात जमा करने का आदेश दिया गया। ऐसा नहीं होने पर इनके घर गिराने की तैयारी होगी।

जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश त्रिपाठी के मुताबिक जिस जमीन पर विवाद है वह एक चीनी मिल की थी जिसे जेल बनाने के लिए सरकार ने लिया है। हालांकि कुछ लोगों ने अवैध रूप से इस जमीन पर कब्जा कर रखा है।

उनका कहना है कि जमीन से जुड़े कागजात उनके पास हैं। ऐसे में हमने वहां लोगों से 17 जून तक सभी जरूरी कागजात जमा कराने को कहा है। इसके बाद ही प्रशासन जरूरी कार्रवाई करेगा और अतिक्रमण हटाया जाएगा।
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आजम खां पर कार्रवाई का आरोप

इस बीच, प्रशासन के नोटिस को लेकर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी के परिवार ने उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक आजम खां उनके घरों को गिराना चाहते हैं, जबकि जमीन विवाद का पूरा मामला कोर्ट में है।

नकवी परिवार के सदस्यों का कहना है कि जिस बंगले में हम हैं ये हमारा नहीं है बल्कि हम यहां किराए पर रह रहे हैं। सरकारी चीनी मिल को लेकर विवाद कोर्ट में है। ऐसे में खान जब सत्ता में आए तो उन्होंने इस मुद्दे को उठाया। पिछले 16-17 साल से हम यहां रह रहे हैं। नकवी जी यहां कभी-कभी आते हैं।

इस मामले में भाजपा के जिला अध्यक्ष बलदेव सिंह ओल्हाक का कहना है कि स्थानीय प्रशासन के इस फैसले के पीछे आजम खां का हाथ है। उनके मुताबिक प्रशासन उनके इशारे पर ही इस जमीन को खाली कराना चाहता है।

पूरे मामले में एक अधिकारी के मुताबिक 1994 में राज्य चीनी मिल बंद हो गई। इससे जुड़े अधिकारियों और स्टाफ के घरों को कुछ लोगों ने कब्जा लिया। बरेली रोड के गोवान कॉलोनी के पास बना नकवी का बंगला भी इसी जमीन पर बना है।
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