सीबीआई की गिरफ्त में आए आईआईटी कानपुर के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर एनएस गजभिये पर डॉ. हरी सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर में 1000 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है। इसका खुलासा सीबीआई की प्रारंभिक छानबीन से हुआ है।
पता चला है कि विदेश आने-जाने पर ही प्रो. गजभिये ने 27 लाख रुपये खर्च किए हैं। यही वजह है कि सीबीआई ने प्रो. गजभिये का पासपोर्ट जब्त कर लिया है। साथ ही बेटी और उनके पत्नी के पासपोर्ट का ब्यौरा भी तलब किया है। आईआईटी कैंपस से हुई गजभिये की गिरफ्तारी की जानकारी देर शाम अन्य शिक्षकों को मिली। इससे हड़कंप का माहौल रहा।
नागपुर यूनिवर्सिटी से वर्ष 1975 में एमएससी केमिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद प्रो. एनएस गजभिये ने वर्ष 1981 में आईआईएससी बंगलुरु से पीएचडी की। 1982 में आईआईटी कानपुर आ गए। यहीं असिस्टेंट प्रोफेसर बने, फिर एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर बन गए।
शिक्षक नियुक्ति, निर्माण कार्य में जमकर किया घोटाला
वर्ष 2008 में उनकी नियुक्ति गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति के रूप में हुई। वहां 13 महीने तक कुलपति रहे, फिर 2009 में डॉ. हरी सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मध्य प्रदेश के कुलपति बन गए। उनका कार्यकाल पांच साल का रहा।
सीबीआई जांच के मुताबिक प्रो. एनएस गजभिये ने 186 शिक्षक और कर्मचारियों की भर्ती मनमाने तरीके से की। असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के 76 पदों की भर्ती के विज्ञापन निकाले गए लेकिन इसके सापेक्ष नियुक्ति 151 को दे दी गई। ज्यादातर शिक्षक गोरखपुर विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के रखे गए।
परीक्षा नियंत्रक भी गोरखपुर के व्यक्ति को बनाया गया। यही नहीं आरक्षित पदों पर सामान्य श्रेणी के व्यक्तियों को नियुक्ति दी गई। वर्ष 2012 में 90 लाख रुपये की किताबें खरीदी गईं, जिनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। मार्च 2012 में ही 3000 कंप्यूटर खरीदे गए हैं। सात लाख रुपये में वीसी दफ्तर का रेनोवेशन कराया गया है।
यही नहीं 2.43 करोड़ रुपये खर्च करके मुंबई से फर्नीचर मंगाया गया। इसका भुगतान एससी, एसटी के छात्रवृत्ति एकाउंट से किया गया। परीक्षा कराने के नाम पर कानपुर, लखनऊ और गोरखपुर की एजेंसी को आठ लाख रुपये दिए गए हैं। शिक्षकों की भर्ती में मनमानी उगाही भी की गई है।
मानव संसाधन मंत्रालय ने भी दिए कार्रवाई के निर्देश
इसी सिलसिले में सीबीआई ने आईआईटी कानपुर में छह बार छापेमारी की लेकिन मेडिकल का ग्राउंड बहाना बनाकर प्रो. गजभिये भाग निकलते। यही वजह है कि सीबीआई ने उनकी पत्नी को नोटिस दिया, फिर नोटिस उनके घर पर चस्पा कर दिया। इसके बावजूद उपस्थित नहीं हुए।
पुलिस ने नागपुर में छापा मारकर प्रो. गजभिये के सुसर हीरामन भगत का बैंक लॉकर भी सीज कर दिया था। प्रो. गजभिये की कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ, नोएडा और नागपुर में संपत्ति है। इसलिए आय से अधिक संपत्ति का मामला भी सीबीआई ने दर्ज किया है।
अब गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आईआईटी निदेशक को पत्र लिखकर प्रो. गजभिये का वेतन रोकने और उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी प्रो. गजभिये के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
गिरफ्तारी के बाद सॉलिड स्टेट केमिस्ट्री एंड नैनो मैटेरियल में विशेषज्ञता रखने वाले सीनियर प्रो. एनएस गजभिये का सस्पेंड होना तय है। हालांकि सीबीआई की अधिकृत जानकारी के बाद ही आईआईटी प्रशासन अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा।