सेना दबे जुबान यह तो मान रही है कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के चीता आउट पोस्ट पर मारे गए पांच जवानों से कोई बड़ी चूक हुई है। लेकिन छह अगस्त की रात की गश्त के दौरान उनके सोए होने की खबर पर फिलहाल सेना कुछ नहीं बोल रही है।
सेना का कहना है कि इस मामले की चल रही कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट से पहले कुछ भी कहना उचित नहीं। रजौरी स्थित 25 डिविजन के कमांडर इस मामले की अंदरुनी जांच भी कर रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक जांच इस बात की भी चल रही है कि करीब 20 पाकिस्तानी स्पेशल फोर्स के जवान एलओसी पर बिछे जटिल माइंस को पार कर चार सौ मीटर भीतर कैसे घुस आए।
पाकिस्तानी सैनिकों ने साइलेंसर लगी बंदूकें इस्तेमाल की थी क्योंकि मारे गए जवानों को जितनी गोलियां लगी हैं। अगर वह सामान्य तरीके से चलाई गई होतीं तो रात के अंधेरे में चीता पोस्ट पर तैनात जवानों की उसकी आवाज जरूर सुनाई पड़ती।
सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि पुंछ सेक्टर के चीता पोस्ट पर जवानों की बदली चल रही थी। करीब तीन महीने से उस आउट पोस्ट पर तैनात पंद्रह जवान पीछे आने वाले थे और उनकी जगह नए जवानों की तैनाती चल रही थी।
जवानों से हुई थी बड़ी चूक?
इस क्रम में एरिया डामिनेशन कार्यक्रम के तहत पुराने जवान नए आए जवानों के साथ रात को गश्त लगा रहे थे ताकि नए जवानों को स्थानीय भौगोलिक स्थित की बारीकियां समझ आ जाए।
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सूत्रों के मुताबिक उस रात गश्त पर निकले छह जवानों में दो नए थे। सूत्रों का मानना है कि गश्त और एंबुश के तरीके इतने सटीक होते हैं कि बिना गलती के दुश्मनों का हावी होना संभव नहीं।
सूत्रों ने माना कि इनसे जरूर कोई ऐसी चूक हुई है, जिसकी वजह से यह मौत का शिकार हो गए।