श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले को लेकर जवानों ने राज्य सरकार के प्रति नाराजगी जताई है। सीआरपीएफ के जवानों का कहना है कि बिना हथियार के वे कैसे आतंकवादियों का सामना कर सकते हैं।
गौरतलब है कि क्रिकेटरों के भेष में सीआरपीएफ कैप पर हमला करने आए अत्याधुनिक हथियारों से लेस आतंकियों का सामना सीआरपीएफ के जवानों ने बगैर किसी हथियार के किया था।
सीआरपीएफ के एक अधिकारी के अनुसार महानिरीक्षक ने पिछले महीने आदेश दिया था कि ड्यूटी के दौरान बल के जवान हथियार लेकर नहीं चलेंगे। अगर 100 जवान स्थानीय पुलिस की मदद पर जाएंगे तो सिर्फ 10 के पास ही हथियार होंगे।
फैसले के पीछे यह तर्क दिया गया था कि स्थानीय लोगों को प्रदर्शन के दौरान ज्यादा नुकसान नहीं हो इसलिए सुरक्षा बलों को हल्के हथियार के साथ तैनात होना चाहिए।
अपने अधिकारी के आदेश का पालन कर रहे जवानों के पास आतंकी हमले के समय हथियार नहीं थे। उस समय कैंप में केवल 10 जवानों के पास ही बंदूक थी।
इस हमले में मध्यप्रदेश के सब इंस्पेक्टर एबी सिंह, कांस्टेबल ओमप्रकाश, झारखंड के कांस्टेबल सुभाष, तमिलनाडु के कांस्टेबल एल पेरूमल, कर्नाटक के कांस्टेबल सतीश सहाय शहीद हो गए।