क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उन्हें इस पद पर बैठाने का पुरजोर समर्थन करने वाले आरएसएस के बीच हनीमून पीरियड खत्म हो गया है? संघ की तरफ से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे तो यही लग रहा है।
एचटी की खबर के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मोदी के काम करने की तानाशाही शैली को लेकर खुश नहीं है। इसके अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिनको लेकर बीजेपी का वैचारिक संगठन सरकार से असंतुष्ट है। फिलहाल आरएसएस की तरफ से मोदी को पूरा समर्थन जरूर मिल रहा है लेकिन भविष्य के संबंधों को लेकर वो वैट एंड वॉच की स्थिति में है।
मोदी के साथ संघ की बढ़ती खटास के संकेत उस समय ही मिल गए थे जब आरएसएस ने बीजेपी और संघ के बीच समन्वय का काम देखने वाले अपने संयुक्त महासचिव सुरेश सोनी को हटाकर कृष्ण गोपाल को इसका जिम्मा सौंप दिया था। नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले सोनी की कार्यशैली को लेकर भी संघ नेतृत्व खुश नहीं था। नरेंद्र मोदी को पहले बीजेपी चुनाव अभियान का प्रमुख और फिर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के पीछे सुरेश सोनी की मुहिम ही मानी जाती है।