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दुनिया का दिल जीतने चलीं उत्तराखंड की 'मैरीकॉम'

Tue, 04 Nov 2014 12:50 PM IST
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
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सुविधाएं, संसाधन न होने के बाद इनकी बदौलत ही पिथौरागढ़ की मोनिका सौन और काशीपुर की प्रियंका चौधरी वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अपने मुक्कों का दम दिखाने के लिए तैयार हैं।
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दोनों 13 से 25 नवंबर तक कोरिया में प्रस्तावित चैंपियनशिप में प्रतिभाग करेंगी। उत्तराखंड से यह मौका हासिल करने वाली ये दोनों पहली महिला बॉक्सर हैं। हालांकि, प्रियंका दूसरी बार चैंपियनशिप में जा रही हैं। बॉक्सिंग के फलक पर छाने को तैयार दोनों बाक्सरों के खाते में कई उपलब्धियां दर्ज हैं।

फिटनेस सुधारने के लिए गई थीं स्टेडियम
पिथौरागढ़ के तिलढुंगरी निवासी 23 वर्षीय मोनिका सौन ने 2014 में नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। उनकी शुरुआत शौकिया हुई जब सेना में तैनात पिता पूरन सिंह सौन ने फिटनेस सुधारने उन्हें स्टेडियम भेजा।
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फुफेरे भाई संजय सिंह की हिदायत पर वर्ष 2004 में केएस महर से बॉक्सिंग सीखनी शुरू की। उसी साल पहले राज्य स्तरीय सब जूनियर में गोल्ड जीता। दसवीं के बाद पटियाला में गुर सीखे।

2006 में सब जूनियर नेशनल का गोल्ड, 2009 से 2011 तक यूथ चैंपियन, 2011 में नेशनल गेम्स में रजत और चाइना कप में कांस्य जीता। मोनिका ने बताया कि पिता हमेशा कहते हैं जीत के लिए खेलो, चोट से डरो नहीं। मोनिका को जून 2014 में रेलवे ने अपने साथ जोड़ा है। मोनिका 75 किलो भार वर्ग में वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रतिभाग करेंगी।

सीनियर नेशनल में स्वर्ण

काशीपुर की नई सब्जी मंडी क्षेत्र की निवासी प्रियंका चौधरी 27 साल की हैं। 2014 में सीनियर नेशनल में सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर रही प्रियंका ने 2003 में काशीपुर साई हॉस्टल के कोच एचएस संधू से बॉक्सिंग सीखनी शुरू की।

चचेरी बहन पूनम त्यागी ने इसकी प्रेरणा दी, जबकि पुलिस से रिटायर सब-इंस्पेक्टर पिता विजय सिंह चौधरी ने आगे बढ़ाया। हालांकि, शुरुआत में परिवार विरोध में था, लेकिन 2004 में पहला नेशनल मेडल जीतने के बाद सब सपोर्ट करने लगे।

2007 में हिसार गई प्रियंका अब तक नेशनल कैंप में ट्रेनिंग ले रही हैं। 2011 तक उत्तराखंड के लिए खेलने के बाद 2012 में प्रियंका को रेलवे ने साथ ले लिया। उन्होंने ने 2010 एशियन गेम्स में कांस्य, 2011 नेशनल गेम्स में कांस्य, 2008 में कनाडा में गोल्ड, 2009 सीनियर नेशनल में स्वर्ण जीता।
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हॉस्टल बने तो उभरेगा हुनर

प्रियंका और मोनिका उत्तराखंड छोड़ चुकी हैं। हाल में नेशनल चैंपियनशिप में दोनों ने रेलवे की ओर से प्रतिभाग किया। उन्हें अपने राज्य से न खेल पाने का मलाल है, लेकिन इसके लिए वे संसाधनों की कमी को वजह बताती हैं।

दोनों का कहना है कि प्रदेश में गर्ल्स बॉक्सिंग हॉस्टल बने तो उत्तराखंड से दर्जनों मोनिका-प्रियंका मिल सकती हैं।

मैरी कॉम देती हैं प्रेरणा
मोनिका, प्रियंका ने बताया कि दिल्ली में नेशनल कैंप में उत्तराखंड की बॉक्सिंग कोच हेमलता बगड़वाल उन्हें प्रशिक्षण दे रही हैं। उन्होंने बताया कि तीन बार वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी मैरी कॉम कैंप में अकसर उनसे मिलती हैं और खेल की बारीकियां सिखाती हैं।

राज्य से अभी नहीं पहुंचे वर्ल्ड चैंपियनशिप में
उत्तराखंड ने देश को हरी सिंह थापा, पदम बहादुर मल्ल, नरेंद्र शाह जैसे विश्वस्तरीय बॉक्सर जरूर दिए हैं। मगर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कोई नहीं पहुंच सका। नरेंद्र शाह 1992 ओलंपिक जरूर खेला, लेकिन विश्व चैंपियनशिप में नहीं जा सके।
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