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ये है IS से खतरनाक संगठन, भारत को खतरा

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कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन हिज्ब-उत-तहरीर दुनिया की नजरों से बचते हुए शातिर तरीके से अपनी विचाराधारा को फैला रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह संगठन सीरिया और ईराक में बर्बरता की पराकाष्ठा पार करने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
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दक्षिण एशिया में बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इसे भारत के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। सीटीएक्स जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, आईएस जहां सिर्फ सीरिया और ईराक में सक्रिय हैं वहीं हिज्ब-उत-तहरीर दुनिया भर में कट्टरपंथी युवाओं का एक बड़ा ढांचा खड़ा कर रहा है। इसके करीब 50 देशों में फैले होने का अनुमान है।

इस संगठन के विश्व भर में 10 लाख से अधिक सक्रिय सदस्य हैं, जो आईएस की सदस्य संख्या से कही अधिक है। अमेरिका के ग्लोबल एजुकेशन कम्युनिटी कॉलेबोरेशन ऑनलाइन के इस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार संगठन की एक हथियार शाखा हरकत उल-मुहोजिरीनफी ब्रितानिया है जो अपने सदस्यों को रसायनिक, जीवाणु और जैविक युद्ध का प्रशिक्षण देती है। इस आधार पर यह आईएस से अधिक खतरनाक माना जा रहा है।
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दिल्ली में कर चुका है प्रदर्शन

खुद को राजनैतिक संगठन बताने वाले हिज्ब-उत-तहरीर ने अपनी वेबसाइट पर दावा किया है कि उसने इस्राइल के अत्याचार के खिलाफ 2010 में दिल्ली में प्रदर्शन किया था।

दिल्ली के इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के सुरिंदर कुमार शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रदर्शन में 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। इस संगठन की भारत में यह आखिरी गतिविधि थी।

भारत को भी खतरा

1952 में यरूशलम में गठित इस संगठन का मुख्यालय लंदन में है। इसकी शाखाएं मध्य एशिया, यूरोप, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में हैं। संगठन का इंडोनेशिया में विशेष प्रभाव है।
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आईएस से मिलती है विचारधारा

संगठन ने दक्षिण एशिया के पाकिस्तान और बांग्लादेश में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई है। इस कारण यह भारत के साथ ही वैश्विक समुदाय के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।

जर्नल के अनुसार हिज्ब-उत-तहरीर और आईएस के विचारधारा में काफी समानता है। आईएसआईएस का समर्थन करने वाले अधिकांश लोग और समूह इस संगठन का भी समर्थन करते हैं। दोनों संगठन शिक्षित युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित करने में जुटे हैं।

आईएस जहां उग्र और आतंकी घटनाओं के जरिए प्रचार पा रहा हैं वहीं हिज्ब-उत-तहरीर गुपचुप तरीके से अपना सामाजिक दायरा बढ़ा रहा है। बांग्लादेश ने अपने देश में समर्थन मिलने के बाद इस संगठन को 2009 प्रतिबंधित कर दिया था।
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