एक समय पूरी दुनिया में खौफ का पर्याय रहा जर्मन तानाशाह हिटलर खुद भी हमेशा मौत के डर के साये में जीता था। उसे अपने खाने के हर निवाले में मौत नजर आती थी, इसी वजह से उसने फूड टेस्टर (खाना चखने वाले) नियुक्त कर रखा था।
हिटलर को हमेशा अपने खाने में जहर दिए जाने का डर सताता रहता था। ऐसे में ये फूड टेस्टर उसका खाना चखने को मजबूर थे और वे भी हर समय दहशत में रहते थे।
खाना चखने के लिए रखी थी लड़कियां
हिटलर के साथ ही उसका खाना चखने के लिए नियुक्त की गईं मार्गट वोक भी बाकी लड़कियों के साथ हमेशा इसी डर में जीती थीं कि पता नहीं किस निवाले पर उनकी मौत लिखी होगी।
वह अब 96 साल की हैं और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जिंदगी के भयानक उतार-चढ़ाव देखने के कई सालों बाद पहली बार हिटलर के फूड टेस्टर के रूप में बिताए गए अपने ढाई साल की कहानी बयान की है।
मार्गट ने बताया कि हिटलर शाकाहारी था, इसलिए जो खाना चखना होता था, वह शाकाहारी ही होता था। हम सभी 14 लड़कियां 20 साल के आसपास की उम्र की थीं।
हमें हर बार डर लगता था कि कहीं खाने में जहर मिला होगा तो हमारा मरना तय है। जब खाना चखकर बीमार नहीं पड़ते थे, तब सभी खानों को अलग-अलग डिब्बों में पैक कर मौजूदा उत्तरी पूर्व पोलैंड स्थित जर्मन सेना के मुख्यालय वोल्फ लेयर में रह रहे हिटलर के लिए ले जाया जाता था।
जब उसने 1945 में आत्महत्या कर ली तो वह भागकर वापस बर्लिन लौट आईं, जबकि बाकी लड़कियां युद्ध में सच में मारी गईं।