गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक माने जाने वाले शादीपुर के ग्रामीण एक मिसाल हैं। गांव के मुस्लिम बस्ती के लोग हिंदुओं के घरों से आए पानी से रोजा इफ्तारी करते हैं। ये सिलसिला सालों से जारी है।
यही नहीं हिंदुओं द्वारा मुस्लिमों के लिए सामूहिक रोजा इफ्तार का भी आयोजन कराया जाता है। गांव में कादरी बिरादरी की बस्ती में रमजान में लगभग सभी मुस्लिम रोजा रखते हैं। रमजान के दौरान यह गांव देशवासियों के लिए एक मिसाल है।
गांव के मुस्लिम बच्चे हिंदुओं के घरों से पानी लाते हैं तो कुछ हिंदू परिवार खुद ही मुस्लिमों के घर पानी देकर आते हैं। मुस्लिमों द्वारा रोजा इफ्तार हिंदुओं के घर से आए इसी पानी की घूंट भरकर किया जाता है। यही नहीं, कई हिंदुओं द्वारा सामूहिक रोजा इफ्तार भी कराया जाता है।