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सीसैट पेपर ने हिन्दी पट्टी के छात्रों को फिर दिया झटका

Thu, 16 Oct 2014 02:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा के सीसैट के पेपर ने हिन्दी पट्टी के अभ्यर्थियों को एक बार फिर झटका दिया। पेपर से अंग्रेजी के प्रश्नों को हटाए जाने के बाद भी राहत नहीं मिली। मंगलवार को घोषित परिणाम से इलाहाबाद के अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी।
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विशेषज्ञों के अनुसार सीसैट का पेपर यहां के अभ्यर्थियों के लिए अब भी पहेली बना हुआ है तो आंदोलन में लंबा समय गवाना तथा गृहमंत्री और कार्मिक मंत्री के आश्वासन के बावजूद परीक्षा नहीं टाले जाने का भी नुकसान उठाना पड़ा।

सिविल सर्विसेज का रिजल्ट निकलने के बाद हॉस्टलों और प्रमुख चौराहों पर जश्न हुआ करता था लेकिन विगत दो वर्षों की तरह इस बार भी सन्नाटा दिखाई दिया। आईएएस के गढ़ रहे एएन झा, जीएन झा हॉस्टल में भी सन्नाटा रहा। ज्यादातर हॉस्टलों में एक भी अंत:वासी इस परीक्षा में सफल नहीं हुआ है।
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'रिजल्ट काफी मायूस करने वाला'

सीसैट लागू होने से पहले तक प्रारंभिक परीक्षा तकरीबन एक हजार अभ्यर्थी सफल होते थे लेकिन इस बार यह संख्या काफी कम बताई जा रही है। देर रात तक मिली जानकारी के अनुसार तक कुछ ही छात्र सफल हुए हैं। छात्रों का कहना है कि रिजल्ट काफी मायूस करने वाला रहा।

प्रमोद पांडेय का कहना है कि अंग्रेजी के सवाल हटाए जाने के बाद इस तरह के रिजल्ट की उम्मीद नहीं थी। राजापुर के दिनेश राय और आशीष मिश्रा का कहना है कि गृहमंत्री ने परीक्षा टाले जाने का आश्वासन दिया था। इससे आंदोलनरत प्रतियोगी और शिथिल पड़ गए और तैयारी प्रभावित हुई लेकिन परीक्षा निर्धारित समय पर हुई। इसका नुकसान हुआ।

विशेषज्ञ डॉ.अतुल मिश्रा का कहना है कि कम्प्रेंहसन का अनुवाद एक बार फिर बाधा बनी। रीजनिंग के भी दो प्रश्नों का हिन्दी वर्जन काफी जटिल रहा, जिसे अभ्यर्थी समझ नहीं पाए। रनीश जैन का कहना है कि सीसैट के नाम पर प्रतियोगियों का गणित, रीजनिंग और अंग्रेजी पर अधिक फोकस होता है। निर्णय और अंतरव्यवहारिक क्षमता, कम्युनिकेशन स्किल आदि विषयों पर ध्यान न देने का काफी नुकसान हुआ।
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कहीं कटऑफ तो बाधा नहीं

प्रारंभिक परीक्षा के अलग-अलग पेपर के लिए न्यूनतम अंक की बाध्यता निर्धारित किए जाने को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी है। पिछले साल यूपीएससी ने सामान्य अध्ययन का 30 तथा सीसैट का 70 अंक कटऑफ निर्धारित किया था।

इसका नतीजा रहा कि सीसैट में कमजोर अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन में अधिक अंक पाने के बावजूद बाहर होना पड़ा, जबकि जीएस में कमजोर प्रतियोगियों को तुलनात्मक दृष्टि से लाभ मिला। हिन्दी पट्टी के अभ्यर्थियों की सफलता में गिरावट को इसे मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके विरोध में प्रतियोगियों ने आंदोलन भी चलाया था।

अभ्यर्थियों का कहना है कि इस बार भी ऐसा ही हुआ है और दोनों पेपर के कटऑफ में भारी अंतर का उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि  आयोग की ओर से प्राप्तांक तथा कटऑफ जारी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगी।
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