सोशल मीडिया पर हंगामे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्णय पर सफाई आई है, जिसमें उसने दुष्कर्म के आरोपी को रिहा करने कारण पीड़िता का रजोनिवृत्त हो जाना बताया था।
दिल्ली हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने 65 साल की महिला के दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को रिहा कर दिया था। अच्छेलाल (49) नामक व्यक्ति पर एक महिला से दुष्कर्म और हत्या का आरोप था। निचली अदालत ने मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रदीप नंद्राजोग और मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने मामले में आरोपी को रिहा करते हुए कहा कि महिला की उम्र 60 साल से अधिक थी, इसलिए उसे दुष्कर्म पीड़िता नहीं माना जा सकता।
'अदालत के निर्णय की गलत व्याख्या'
सोशल मीडिया में हंगामे के बाद दो जजों में से एक जज के कार्यालय ने सफाई दी और कहा मामले में 'रजोनिवृत्त' शब्द पर अधिक जोर दिया जा रहा है, जबकि आरोपी की रिहाई के अन्य कारण थे।
सफाई में कहा गया है कि जजों की बेंच ने कभी ये नहीं माना कि पीड़िता का रेप नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने रजोनिवृत्त की उम्र पार कर ली है या उस उम्र मे महिला के साथ बलपूर्वक बनाया गया संबंध रेप नहीं है।
जज के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि रजोनिवृत्त शब्द को अलग रखा जाना चाहिए और उसे आरोपी को रिहा करने के कारण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। निर्णय में कहीं ये नहीं कहा गया है कि आरोपी को इसलिए रिहा किया गया है क्योंकि कोर्ट मानती है कि जो महिला रजोनिवृत्त हो चुकी है, उसका दुष्कर्म नहीं किया जा सकता। ये अदालत के निर्णय की बिलकुल गलत व्याख्या है।
मेडिकल रिपोर्ट भी थी रिहाई का आधार
31 अक्टूबर के अपने फैसले में जस्टिस प्रदीप नंद्राजोग और मुक्ता गुप्ता ने निचली अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें अच्छेलाल को एक महिला के दुष्कर्म और हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। महिला उस समय शराब पिए हुए थी।
अदालत ने अपनी सफाई में कहा कि आरोपी को इसलिए रिहा किया गया क्योंकि उसकी ये बिलकुल अंदाजा नहीं था कि महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने से उसकी मौत हो जाएगी और उसने ये जानबूझकर भी नहीं किया।
उसे दुष्कर्म के अरोपों से बरी कर दिया गया क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया था कि दोनों के बीच शराब पीने के बाद सहमति से शारीरिक संबंध बने थे।