नरेंद्र मोदी देश की सत्ता हासिल कर दिल्ली में विराजमान तो हो गए लेकिन उनका गुजरात प्रेम पीछा नहीं छोड़ रहा। यही कारण है गुजरात के कुछ चुनिंदा अधिकारियों को वहां से ट्रांसफर कर दिल्ली लाया गया है।
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, गांधीनगर का सचिवालय अब अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ लुटियंस जोन में पहुंच रहा है। मंगलवार को देर शाम 50 सीनियर अधिकारियों का गुजरात से तबादला कर केंद्र सरकार के कार्यालयों में नियुक्ति दी गई है जो प्रमुख विभागों और मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
गुजरात से दिल्ली आने वाले सीनियर अधिकारियों में हसमुख आढिया भी हैं जिन्हें नरेंद्र मोदी का बेहद करीबी और विश्वासपात्र अफसर माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इन्हें वित्त मंत्रालय में नियुक्त किया गया है।
गुजरात के अफसर क्यों आ रहे हैं दिल्ली?
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पांच महीने के कार्यकाल में उन सभी अधिकारियों को दिल्ली शिफ्ट कर चुके हैं जो उनके मुख्यमंत्री होने दौरान उनका भारोसा जीतने में कामयाब रहे थे।
इतना ही नहीं केंद्र सरकार के इस कदम से ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी पूरी गुजरात टीम के जरिए गुजरात की ही तरह पूरे देश में अपनी नीतियां लागू करना चाहते हैं।
वहीं गुजरात में मोदी के भरोसेमंद रहे अधिकारियों की टीम में अब केवल दो ही अधिकारी बचे हैं। इनमें से एक हैं के. कैलाशनाथन जो गुजरात मुख्यमंत्री कार्यालय में चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं जबकि दूसरे अधिकारी जीसी मुरु हैं जो रिटायर होने के बाद भी संविदा पर प्रमुख सचिव के रूप में तैनात हैं।
मोदी सरकार की ओर से इन अधिकारियों के तबादले करने के पीछे प्रमुख कारण यह माना जा रहा है कि मोदी इन लोगों के साथ काम करना सुविधाजनक मानते हैं और सहजता का अनुभव करते हैं।
पीएमओ में नियुक्त होंगे ये अधिकारी
मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले गुजरात कैडर के करीब आठ अधिकारी केंद्र सरकार में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इन अधिकारियों को स्थानांतरित करते हुए केंद्र सरकार कुछ को उनके गृहराज्य भेजेगी तो कुछ को दूसरे विभागों में नियुक्त करेगी।
गुजरात से आए अधिकारियों में हसमुख आढिया को वित्त सचिव के तौर पर नियुक्ति दी गई है तो प्रधानमंत्री कार्यालय में अरविंद शर्मा ओर संजय भावसर को नियुक्ति मिलना लगभग तय है। खास बात यह है कि गुजरात कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को प्रधानमंत्री अतिरिक्त प्रमुख सचिव बनाया गया है।
वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में राजेश किशोर को नियुक्त किया जाएगा। जबकि गुरुप्रसाद महापात्रा को वाणिज्य मंत्रालय में तैनात किया जाएगा।
ईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय को एक प्रवक्ता की जरूरत है। प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य मंत्रालयों में काम कर रहे अधिकारियों में से ही किसी को प्रवक्ता बनाने का विचार किया जा रहा है।