चुनावी घोषणा पत्र को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता की याचिका पर जवाब देने के लिए गुजरात सरकार ने थोड़ा और समय मांगा है।
याचिका में 2012 के विधानसभा चुनावों में अपने घोषणा पत्र में पत्नी का नाम नहीं बताने पर मोदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी।
राज्य सरकार द्वारा समय मांगे जाने के चलते एडिशनल सेशन जज जीएन राणा ने मामले की सुनवाई एक अक्तूबर तक स्थगित कर दी। अदालत ने गत 21 अगस्त को आप सदस्य निशांत वर्मा की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इससे वर्मा की याचिका को निचली अदालत ने एक साल देरी होने के आधार पर खारिज कर दिया था।
हालांकि कोर्ट ने कहा था कि मोदी द्वारा अपनी वैवाहिक स्थिति न बताना कथित तौर पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125(ए)(3) का उल्लंघन है। इस धारा के उल्लंघन में जुर्माने के अलावा छह महीने की सजा भी प्रावधान है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की शिकायत एक साल के भीतर होनी चाहिए।