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हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों को केंद्र ने चेताया

Tue, 19 Feb 2013 12:07 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
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केंद्र सरकार ने बुधवार से होनी वाली दो दिवसीय हड़ताल के प्रति सख्त रुख दिखाया है। सरकार ने हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और भत्तों में कटौती जैसे परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
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इस बीच सोमवार रात को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता विफल हो गई। इसके बाद ट्रेड यूनियनों ने 20 और 21 फरवरी को हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हड़ताल को वापस लिए जाने की अपील की थी, जिसे ट्रेड यूनियनों ने खारिज कर दिया था।

ट्रेड यूनियनों ने कहा कि रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता वाली कमेटी कोई भी ठोस प्रस्ताव देने में विफल रही है और उनकी कोई भी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है। आईएनटीयूसी के अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी ने कहा कि हड़ताल होगी। वे केवल समय की बात कह रहे हैं।
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उनका कहना है कि वे मांगों पर विचार करेंगे और उसके बाद ही कोई कदम उठाएंगे। इसको स्वीकार किया जाना हमारे लिए संभव नहीं है। दो घंटे तक चली बैठक में 11 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक रक्षा मंत्रालय में हुई बैठक में पी. चिदंबरम शामिल नहीं हुए।

इससे पहले दिन में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों को भेजे खत में प्रस्तावित हड़ताल की अवधि के दौरान कर्मचारियों की किसी भी तरह की छुट्टी को मंजूरी नहीं देने का सख्त निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित विभागों से हड़ताल में शामिल हो सकने वाले कर्मचारियों की अनुमानित संख्या बताने को भी कहा है। विभाग ने अपने निर्देश में कहा है कि हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों को भत्तों में कटौती, अनुशासनात्मक कार्रवाई समेत अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

हड़ताल में कौन-कौन हो रहा है शामिल
20 और 21 फरवरी को होने वाली हड़ताल में श्रमिक संगठनों के साथ सभी राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण व सहकारी बैंक समेत रिजर्व बैंक अधिकारी और कर्मचारी हिस्सा लेंगे। 10 लाख बैंक कर्मचारियों समेत इस हड़ताल में देशभर में 10 करोड़ कामगारों के शामिल होने का अनुमान है। यह हड़ताल मूल्य वृद्धि, श्रम कानूनों के उल्लंघन, बैंकों के विलय, स्थायी तौर पर बैंकिंग सेवाओं और नौकरियों की आउटसोर्सिंग और वेतन समीक्षा की मांग को लेकर की जा रही है।

'दो दिवसीय हड़ताल को लेकर सभी तैयारी पूरी हो चुकी है। अगर सरकार ने पहल करने की कोशिश की होती तो कई मांगें पहले ही पूरी की जा सकती थीं। ऐसा नहीं होने के कारण श्रम संघों को हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा है।
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- वैजनाथ राय, अखिल भारतीय महामंत्री, भारतीय मजदूर संघ

'हड़ताल के कारण मनरेगा, सामाजिक सहायता पेंशन जैसे लाभार्थियों का भुगतान ठप रहेगा।'
- शिवकरण द्विवेदी, उप महासचिव, ऑल इंडिया रिजर्व रूरल बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन
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