चीनी को नियंत्रण मुक्त करने का मन बना चुकी सरकार ने गरीबों को राशन के जरिए रियायती दर पर चीनी उपलब्ध कराने का रास्ता भी ढूढ़ लिया है। सरकार की योजना लेवी चीनी की खरीद पर पड़ने वाले बोझ को उत्पाद शुल्क बढ़ाकर पूरा करने की है।
कृषि शरद पवार ने सोमवार को खाद्य मंत्रालय के इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए कहा कि उत्पाद शुल्क को 0.71 रुपये से बढ़ाकर 1.50 रुपये प्रति किलो किए जाने का चीनी की बाजार की कीमतों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। वहीं सरकार पर पड़ने वाले बोझ की भी भरपाई हो जाएगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 84वीं आम बैठक का आरंभ करने के बाद पवार ने बताया कि चीनी को सरकार के नियंत्रण से मुक्त किए जाने से इस उद्योग को अन्य उद्योगों की तरह बढ़ने का मौका मिलेगा। सरकार को राशन के लिए सालाना लगभग 27 लाख टन चीनी की जरूरत होती है।
इसके लिए सरकार को भी राशन के लिए खुले बाजार से चीनी की खरीद करनी होगी। अभी मिलें सरकार को राशन के लिए 19.04 रुपये प्रति किलो की दर पर चीनी दे रही हैं। लेकिन नियंत्रण मुक्त होने के बाद सरकार को बाजार मूल्य चुकाने होंगे।
उन्होंने बताया कि मौसम के मौजूदा मिजाज से कुछ एक क्षेत्रों में रबी फसलों को आंशिक नुकसान हुआ है। उत्तर भारत में कुछ एक क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है। इसका विपरीत असर खड़ी फसलों पर हुआ है। हालांकि अभी तक कृषि मंत्रालय के पास फसलों के नुकसान का पूरा ब्योरा नहीं आया है। लेकिन दूसरी ओर मौजूदा बरसात रबी फसलों के लिए लाभकारी है। उम्मीद है कि इस साल भी गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष की बराबर हो सकेगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे ऐसे कदम उठाएं कि उनके नवीनतम शोध व अनुसंधान का लाभ किसानों तक सीधे पहुंच सके।