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इन बिलों के जरिए अर्थव्यवस्था को तेजी देगी सरकार

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24 नवंबर से शुरू हो रहे संसद का शीतकालीन सत्र आर्थिक सुधारों को गति देने का जरिया बन सकता है। मानसून सत्र में इस आशय का संदेश देने में नाकाम रही सरकार ने इस बार बीमा, भूमि अधिग्रहण संशोधन और रियल एस्टेट विधेयक को कानूनी जामा पहनाने की अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
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संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने विभिन्न मंत्रियों को पत्र लिखकर संसद के दोनों सदनों में लंबित पड़े 67 विधेयकों को पारित कराने की तैयारी शुरू करने को कहा है। इस समय लोकसभा में 8 तो राज्यसभा में 59 विधेयक लंबित हैं।

पत्र में आगामी 7 नवंबर तक मंत्रालयों से वापस लिए जाने वाले और पेश किए जाने वाले विधेयकों की सूची तलब की गई है। संबंधित मंत्रालयों को उससे संबंधित लंबित विधेयकों की सूची भी दी गई है।
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पत्र में वेंकैया ने मंत्रालयों से संबंधित लंबित विधेयकों की सूची भी भेजी है। इसके साथ ही उन्होंने सांसदों को पत्र लिखकर सदन में उपस्थित रहने का अनुरोध किया है।
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23 दिसंबर तक चलेगा सत्र

23 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में 22 बैठकें होंगी। सरकार की मंशा इन 22 बैठकों में आर्थिक सुधारों से जुड़े लंबित विधेयकों को हर हाल में कानूनी जामा पहनाने की है।

इन विधेयकों के प्रावधानों पर मतभेदों को सुलझाने के लिए सरकार विभिन्न स्तर पर जहां विपक्ष से बातचीत करेगी, वहीं सरकार के रणनीतिकार संख्या बल जुटाने में सत्र शुरू होने से पहले ही लग जाएंगे। केंद्र की मोदी सरकार मानसून सत्र के दौरान आर्थिक सुधारों से जुड़े विधेयकों को पारित न करवा पाने की कमी शीत सत्र में पूरा करना चाहती है।

सरकार की निगाहें खासतौर पर आर्थिक क्षेत्र से जुड़े उन विधेयकों पर है, जिसे पारित कराकर आर्थिक सुधारों की गाड़ी को गति दी जा सकती है। संसदीय कार्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए अगले महीने के तीसरे हफ्ते से ही सरकार प्रयास शुरू कर देगी। इस क्रम में जहां विपक्ष को मनाने की रणनीति अपनाई जाएगी, वहीं जरूरी संख्या बल जुटाने का भी इंतजाम किया जाएगा।
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