नर पिशाच सुरेंद्र कोली की याचिका खारिज होने के साथ ही उसे फांसी के तख्ते तक ले जाने का रास्ता साफ हो गया है। सर्वोच्च अदालत ने निठारी के बलात्कार और सिलसिलेवार हत्याकांड के दोषी सुरेंद्र कोली की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
कोली ने हत्या के मामलों में से एक में उसे दोषी ठहराने और उसकी मौत की सजा बरकरार रखने के निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू, जस्टिस अनिल दवे और जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की बेंच ने कहा कि हम पुनर्विचार याचिका खारिज करते हैं। हमें अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार के लिए इसमें कोई आधार नजर नहीं आता।
कोली की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया और कहा कि अभियुक्त का इकबालिया बयान झूठा था और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि एक निर्दोष की जिंदगी किसी भी दूसरी चीज से अधिक महत्वपूर्ण है। मैं हतप्रभ हूं कि ऐसा न्यायपालिका में कैसे हो सकता है।
कोली के इकबालिया बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अभियुक्त को पुलिस ने पीड़ितों के सिर्फ नाम ही नहीं बल्कि अपराध करने के तरीके को भी याद करने के लिए कहा था। अभियुक्त का यह भी कहना था कि उसे यातना दी गई। लेकिन इस तथ्य पर न तो निचली अदालत ने और ना ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया।