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सरकार बताएगी कितनी मैली है गंगा, निकाला खास तरीका

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सरकार अर्द्धकुंभ और मकर संक्रांति पर गंगा में डुबकी लगाने वालों को इसके प्रदूषण से रूबरू कराएगी। गंगा भक्तों को जल की गुणवत्ता के बारे में सटीक जानकारी देने के लिए केंद्र सरकार देश के प्रमुख गंगा घाटों पर जल्द ही प्रदूषण स्तर प्रदर्शित करने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिसप्ले बोर्ड लगाने जा रही है।
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इससे भक्तों को घाट पर गंगा की सफाई स्तर की पूरी जानकारी मिल सकेगी। यह प्रयास पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के घाटों से शुरू होकर माघ मेले के दौरान इलाहाबाद में भी जोर पकडे़गा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नमामि गंगे अभियान को सफल बनाने में जुटे जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार गंगा के हर प्रमुख घाट पर जल की गुणवत्ता की जानकारी देने वाले बड़े डिसप्ले बोर्ड लगाए जाएंगे।
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जिसमें घाट के जल की पूरी गुणवत्ता का पल-पल अपडेट प्रदर्शित होगा। इससे श्रद्धालु उन जगहों पर डुबकी लगाने से बचेंगे, जहां गंगा का पानी बेहद प्रदूषित है। हालांकि अहम गंगा घाटों पर पानी को साफ रखने के लिए सरकार ने विशेष ट्रेस मशीनों को चलाने का निर्णय लिया है।
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यह है सरकार का मकसद

सरकार का यह प्रयास गंगा भक्तों को गंदे पानी में नहाने से होने वाली बीमारियों से निजात दिलाने के लिए है। कई शोध और सर्वे से यह उजागर हुआ है कि प्रदूषण के वजह से कई जगह गंगा इतनी मैली हो गई है कि उसमें नहाने से लोगों को चर्म रोग और कैंसर सरीखी खतरनाक बीमारी का सामना करना पड़ रहा है। गंगा में कई जगह खतरनाक रसायन क्रोमियम की बहुलता पाई गई है। जिसकी वजह से लोगों को कैंसर और चर्म रोग हो सक ता है।

घाटों पर गंगा में प्रदूषण की जानकारी देने का मकसद भक्तों को गंदे पानी में नहाने से होने वाली बीमारियों से निजात दिलाना है। कई शोध और सर्वे से यह उजागर हुआ है कि प्रदूषण के वजह से कई जगह गंगा इतनी मैली हो गई है कि उसमें नहाने से लोगों को चर्म रोग और कैंसर सरीखी खतरनाक बीमारी का सामना करना पड़ रहा है।
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