केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भूखे गरीब लोगों को भोजन और आमदनी का अगर कोई जरिया मिल रहा है तो उन्हें निजता के अधिकार से मतलब नहीं है। चूंकि सरकारी सुविधाओं को लाभ उठाने के लिए ही लोग खुद आधार कार्ड बनवा रहे हैं ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को बीच में नहीं आना चाहिए।
केंद्र सरकार का यह पक्ष न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ को नागवार गुजरा। पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई गरीब है उसे निजता के अधिकार से महरूम रखा जाए, यह गलत है।
केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि आधार कार्ड बनाना लोगों की स्वेच्छा पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि क्या अदालत 100 करोड़ लोगों के लिए बोल सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को आधार केइस्तेमाल में परेशानी दिखती है तो वह इसका इस्तेमाल न करें। दिहाड़ी पर काम करने वाला व्यक्ति या जिसे खाने के लिए भोजन नहीं है, आधार कार्ड ऐसे व्यक्ति केलिए जरूरत है।
उन्होंने अदालत से कहा कि उसे देश केकरोड़ों लोगों के बारे में सोचना चाहिए न कि उन चंद लोगों की जो निजता केअधिकार की बात कर रहे हैं।