स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने आरएएस प्री परीक्षा 2013 फर्जीवाड़ा प्रकरण के मास्टरमाइण्ड की तलाश अब प्रदेश से बाहर शुरू कर दी है।
एसओजी ने शनिवार को राजस्थान के अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कुछ जगह दबिश दी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। एसओजी ने पूरी कार्रवाई गोपनीय रखी, यहां तक की एसओजी की टीम मास्टरमाइण्ड का नाम तक छिपा रही है।
एसओजी सूत्रों के अनुसार ये मास्टरमाइंड राजस्थान का नहीं है, बल्कि बाहर का व्यक्ति है और उसकी पहचान कर ली गई है। सूत्रों के अनुसार एसओजी मान रही है कि भनक लगने के कारण मास्टरमाइंड भूमिगत हो गया है, लेकिन उसकी तलाश और तेज की जाएगी। ये मास्टरमाइंड ही पेपर आउट करता था, जो गिरोह के सरगना अमृत लाल मीणा को पहुंचाया जाता था।
30-30 लाख रुपए की होती थी वसूली
इसके बाद अभ्यर्थियों से वसूली यही गिरोह करता था। इस गिरोह ने आरएएस प्री परीक्षा 2013 के पेपर के लिए अभ्यर्थियों से 30-30 लाख रुपए तक वसूली की थी।
गौरतलब है कि इस परीक्षा की मेरिट में 50 छात्रों में से 32 एसटी के होने के कारण राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) को फर्जीवाड़े का शक हुआ और गुप्त पत्र के जरिए आरपीएससी ने एसओजी को मामले की जांच के लिए कहा था।
जांच में पता चला कि सरगना अमृत लाल के परिवार और रिश्तेदारी के 20 लोग आरएएस प्री की टॉप-50 मैरिट में आए, जिसमें उसकी पत्नी भी थी।
नहीं थी बात करने की इजाजत
इधर, एसओजी के एक टीम ने अमृत लाल मीणा को उन ठिकानों की निशानदेही करवाई, जो पूछताछ में सामने आए थे। इन स्थानों पर ही पेपर आउट करके अभ्यर्थियों को दिया जाता था और किसी से भी बात करने की इजाजत नहीं दी जाती थी।
उनका मोबाइल भी ये गिरोह अपने पास रखता था। अगले दिन पेपर दिलवाने के लिए सेंटर तक भी यही गिरोह इन अभ्यर्थियों को पहुंचाता था। पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह ऐसा अधिक से अधिक धन कमाने के लिए करता था।
यदि वह बात करने की इजाजत देता, तो ये अभ्यर्थी अन्य परीक्षार्थिर्यों तक पेपर आउट की बात पहुंचा देते और उन्हें भी आनेवाले सवालों की जानकारी दे देते। अमृत लाल से उन स्थानों की भी तस्दीक करवाई, जहां वह आउट पेपर को हल करवाता था।