अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार और जान एफ. कैनेडी सेंटर फार परफार्मिंग आर्ट्स के बोर्ड आफ ट्रस्टीज के जनरल ट्रस्टी अप्रवासी भारतीय फैंक फखरुल इस्लाम आजमगढ़ क्षेत्र के अपने पैतृक गांव कौरा गहनी को शिद्दत से याद करते हैं। बचपन में दोस्तों के साथ की गईं शरारतें, पानी भरे धान के खेतों में पतंग के पीछे दौड़ना उन्हें आज भी याद है। मदरसा 'इसरार' में पढ़े दिन उन्हें अच्छी तरह याद हैं, जिसमें उन्होंने कक्षा पांच तक शिक्षा पाई। आज भी उनकी इच्छा होती है कि वे अपने गांव आकर बच्चा बनकर उन्हीं दोस्तों के साथ धान के खेत में पतंग लूटने के लिए दौड़ें। 'अमर उजाला' से ई-मेल के जरिये बातचीत में उन्होंने अपनी स्मृतियां साझा कीं।
हाल में प्रतिष्ठित मार्टिन लूथर किंग जूनियर पुरस्कार से सम्मानित फ्रैंक इस्लाम 30 जनवरी को अपने जिले आजमगढ़ आ रहे हैं। बातचीत में उन्होंने बताया कि मदरसा इसरार से मिली सीख ने मेरी जिंदगी की बुनियाद को मजबूती दी। उसी की बदौलत एक मध्यमवर्गीय, धार्मिक परिवार का युवक अमेरिका के आभिजात्य वर्ग में सम्मानजनक जगह बना सका। कहा कि मेरे मदरसे ने मुझे सहनशीलता और दूसरे धर्मों को बराबर का सम्मान देना सिखाया। वह कहते हैं कि मुझे वह दिन नहीं भूलता जब गांव में मेरे पिता ने मुझे मोटरसाइकिल चलाना सिखाया था।
उन्होंने ही मुझे धान के पानी भरे खेत में कैसे दौड़कर पतंग लूटी जाती है, यह बताया। वह कहते हैं कि मुझे अपने दोस्तों के साथ बिताए वे दिन नहीं भूलते जब सुबह तड़के मैं गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर मार्टिनगंज स्थित विद्यालय में परीक्षा देने जाता था।