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'सनातन धर्म की रक्षा के लिए 20 लाख सैनिकों की जय हिंद फौज'

Fri, 23 Jan 2015 08:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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इलाहाबाद संगम की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी में त्रिवेणी मार्ग स्थित काशी सुमेर पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के शिविर में बुधवार को हुई धर्मसभा में गौ, गंगा, गायत्री, संस्कृत भाषा के उन्नयन, राममंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने सहित नौ प्रस्ताव पारित किए गए। संतों ने मंदिरों का अधिग्रहण किए पर घोर आपत्ति की।
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शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार वृंदावन, काशी सहित देश केकई तीर्थ स्थानों का अधिग्रहण कर चुकी है और अब चोरी की घटनाओं का हवाला देकर विंध्याचल सहित कई मंदिरों के अधिग्रहण की तैयारी में है जबकि देश के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। तीर्थ स्थानों का सरकारीकरण (मंदिरों के अधिग्रहण) अविलंब बंद होना चाहिए। उन्होंने सपा सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप भी लगाया। शंकराचार्य ने फिर हिन्दुओं से दस-दस बच्चे पैदा करने और संयासियों को सिला कपड़ा न पहनने की सलाह दी।

काशी सुमेर पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने भी विंध्याचल मंदिर अधिग्रहण किए जाने का विरोध किया। कहा, भारत कैलाश मानसरोवर को अपने मानचित्र में शामिल करे जैसे चीन अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश को शामिल करता है। विवाह पंजीकरण अधिनियम में संशोधन के साथ माता-पिता की स्वीकार्यता केबिना कोर्ट में भी शादी को विधिक मान्यता न मिले। एमए स्तर तक संस्कृत पढ़ाने और अधिकाधिक पौधरोपण भी किया जाए।
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स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने फिल्म ‘पीके’ को सनातन धर्म के प्रति षड़यंत्र बताया। कहा, इसका अर्थ पाकिस्तानी-कुत्ता होना चाहिए क्योंकि इसमें सनातन धर्म की भावनाओं से खिलवाड़ है।

सनातन धर्म की रक्षा को बीस लाख सैनिक
शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए कर्नल तेजेंद्र पाल के संयोजन में जय हिंद फौज का गठन किया जाएगा। वहीं कर्नल धर्मवीर डोगरा और एक मेजर की देखरेख में कमेटी बनाई गई है। अब तक 18 टीमों का गठन किया गया है। 15 मार्च तक सौ टीमे बनेंगी जिसमें बीस लाख सेवानिवृत्त सैनिक शामिल होंगे।

यमुना सफाई के लिए भी यात्रा
यमुना की सफाई के लिए 15 मार्च को यात्रा निकाली जाएगी जो वृंदावन से शुरू होकर हथिनीकुंड पहुंचकर पूरी होगी। इसमें एक लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे।
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अब कलश में ‘नमामि गंगे’

गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और पहल की है। फूल-माला सहित तमाम पूजा सामग्री सीधे गंगा के बजाय कलश में विसर्जित की जाए, इसके लिए कवायद शुरू की गई है। इलाहाबाद आए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्रालय भारत सरकार के सचिव अनुज कुमार बिश्नोई ने बृहस्पतिवार को संगम क्षेत्र के दौरान स्थानीय अफसरों को इस बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

साथ ही गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए व्यापक रूप से प्रचार अभियान चलाने को कहा। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और नगर निगम के अफसरों के साथ संगम क्षेत्र का निरीक्षण करने निकले केंद्रीय सचिव ने अफसरों को निर्देश दिए कि गंगा किनारे कलश रखवा दिए जाएं और कलश में गंगा जल भर दिया जाए। गंगा में पूजा सामग्री विसर्जित करने के लिए आने वालों से अनुरोध किया जाए कि वे कलश में ही विसर्जन करें। उन्हें बताया जाए कि कलश में भी गंगा जल है। इसके लिए निर्धारित ड्रेस में वालंटियर्स की तैनाती की जाए और उनकी ड्रेस पर ‘नमामि गंगे’ लिखवा दिया जाए। वालंटियर्स ही लोगों को इसके लिए प्रेरित करें।

कलश भरने के बाद पूजा सामग्री निकाल ली जाए और कलश में फिर से गंगाजल भर दिया जाए। इसके अलावा गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की अपील और तमाम जानकारियों के साथ ‘नमामि गंगे’ के बड़े-बड़े बैनर तीर्थ पुरोहितों और घाटियों के तख्त पर लगवा दिए जाएं ताकि वहां आने वाले श्रद्धालु जागरूक हो सकें। लिखावट हल्के नीले और सफेद रंग में हो ताकि लोगों की उस पर आसानी से नजर पड़ सके। उन्होंने मेला प्रशासन कार्यालय पर लगे ‘नमामि गंगे’ लिखे एलईडी की ऊंचाई बढ़ाने के निर्देश भी दिए। साथ ही गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अधिक से अधिक प्रचार माध्यमों की सहारा लेने को कहा।

सचिव ने गंगा सफाई के लिए मंगाई गई मशीन भी देखी और कहा कि मशीन का प्रयोग पहले गंगा के उसे हिस्से में किया जाएगा, जहां सफाई की ज्यादा आवश्यकता हो। उन्होंने बड़े हनुमान जी के दर्शन भी किए। निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे एडीएम सिटी एसके शर्मा ने बताया कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सचिव के निर्देशों का पालन किया जाएगा। सचिव ने कलक्ट्रेट परिसर का भी निरीक्षण किया और वहां सफाई व्यवस्था का जायजा लेने के साथ विभागों की कार्यप्रणाली देखी।
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