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हत्यारे पीयूष ने दी थी 40 लाख की सुपारी!

Fri, 01 Aug 2014 01:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
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ज्योति की हत्या की सुपारी 40 लाख रुपये होने की चर्चा गुरुवार को गर्म रही। पुलिस को भनक लगी है कि ये पूरी रकम पीयूष ने दे भी दी थी और इसे एक हत्यारोपी के चचेरे भाई के पास सुरक्षित रखवा दिया गया ताकि पैरवी में रकम काम आ सके। यह बात सामने आने के बाद पुलिस ने इस ओर कान लगा दिए हैं। पुलिस अफसरों का कहना है कि हत्यारोपियों को रिमांड पर लेकर इस बारे में पूछताछ की जाएगी।
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हाईप्रोफाइल ज्योति हत्याकांड की जांच टीम में शामिल एक अफसर का कहना है कि छानबीन के दौरान पता चला है कि पीयूष ने पत्नी की हत्या कराने के लिए अवधेश से 40 लाख रुपये में डील की थी। यह रकम उसने अवधेश को दे भी दी थी। अवधेश ने वारदात में शामिल एक आरोपी को यह रकम दी थी। उसने अपने चचेरे भाई के पास रकम रखवा दी। चचेरा भाई रकम लेकर गायब हो गया।

इस अफसर का कहना है कि 50 हजार रुपये में करोड़पति की बीवी की हत्या की बात किसी के गले नहीं उतर रही है। 50 हजार में भी चार हिस्सेदार हैं। इसलिए पुलिस टीम अब 40 लाख की सुपारी वाले बिन्दु पर जांच कर रही है।
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सुपारी के बारे में हत्यारोपियों के बयान

इधर, हत्यारोपी रेनू कनौजिया ने एसएसपी की प्रेस कांफ्रेस में कहा कि उन लोगों को सुपारी की रकम में एक भी रुपया नहीं मिला है। सारी रकम अवधेश के पास है। अवधेश ने उन लोगों से कहा था कि सुपारी की रकम आपस में बराबर से बांटी जाएगी। इसके अलावा ज्योति से लूटे गए जेवरों को बेचने पर मोटी रकम मिलेगी। इसे भी बराबर के हिस्से में बांटा जाएगा।

रेनू का कहना है कि ज्योति को मारने के एवज में अब तक उसे केवल एक केन बीयर पीने को मिली और खाने को चाऊमीन मिली। यही बात हत्यारोपी आशीष, सोनू ने भी कही।

वहीं अवधेश का कहना है कि ज्योति की हत्या की सुपारी 50 हजार रुपये में ही ली थी। पीयूष ने एक बार 20 और दूसरी दफा में 10 हजार रुपये उसे दिए थे। बाकी रकम बाद में देने की बात कही थी।

नहीं था पुलिस का डर

ज्योति की हत्या करते वक्त कार जीटी रोड पर दौड़ रही थी। पुलिस पिकेट, पुलिस चौकी और थाने के सामने ही आरोपी कार से निकले लेकिन किसी की नजर नहीं पड़ी। वारदात के बाद सभी आरोपी अपने घर गए और आराम से सो गए। परिवार वालों को भी अपनी करतूत पता नहीं चलने दी।

हत्यारोपी अवधेश ने बताया कि ज्योति को अगवा करने के बाद वह कार से सीएसए रोड से होते रावतपुर चौराहा पहुंचा। वहां से कार जीटी रोड पर गुरुदेव टॉकीज की तरफ मोड़ दी। वह रावतपुर चौराहे पर लगी पुलिस पिकेट, गुरुदेव पुलिस चौकी और कल्याणपुर थाने से सामने से कार लेकर गुजरा पर कहीं भी पुलिस वालों ने उसकी कार नहीं रोकी। इसके बाद कल्याणपुर क्रासिंग से कार पनकी रोड पर मोड़ दी।

पनकी थाने के पास एक गली में कार खड़ी करके वारदात में शामिल सभी लोग आराम से वहां से निकल आए। हत्यारोपी आशीष ने बताया कि वारदात के बाद अवधेश को छोड़कर सभी आरोपी अपने घर  जाकर सो गए थे। अवधेश ने कहा कि ज्योति की हत्या के वक्त न तो उसे और उसके साथियों को डर लगा न ही पुलिस का भय।
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घटना की रात देर से घर पहुंचे थे

पांडु नगर कच्ची बस्ती में रहने वाला रेनू कनौजिया क्षेत्र में ही बदलानी हाउस में ड्राइवर है। उसके पिता रामबाबू कपड़ों में प्रेस का काम करते है। रामबाबू का कहना है कि 27 जुलाई को रविवार होने की वजह से रेनू काम पर नहीं गया था। वह शाम को घर से निकला था। देर रात घर लौटा था। इसी मुहल्ले में रहने वाले आशीष की मां देवी ने बताया कि उनका बेटा हलवाई का काम करता है। आशीष 27 जुलाई को घर से निकला था। देर रात घर लौटा था। देवी का कहना है कि पकड़े गए रेनू, सोनू, अवधेश और आशीष सभी पांडु नगर कच्ची बस्ती में रहते हैं। सभी आपस में दोस्त है। एक-दूसरे में गहरी छनती है।

अवधेश पर नाराज हुआ था पीयूष
हत्यारोपी सोनू का कहना है कि 20 जुलाई को गंगा बैराज पर ज्योति की हत्या करना तय था। पीयूष ज्योति को कार से लेकर वहां पहुंच गया था पर बरसात होने से वे लोग नहीं पहुंच सके। काफी देर इंतजार के बाद पीयूष ज्योति को लेकर घर लौट गया था। अगले दिन पीयूष ने अवधेश को मोबाइल पर भला-बुरा कहा था। यह तक कहा था कि हमने पैसा तुम लोगों को दे दिया है। फिर भी ज्योति जिंदा है।

पीयूष के कहने पर भी उतारे थे जेवर
ज्योति की हत्या को लूट का रूप देने के लिए आरोपियों ने ज्योति के शरीर से गहने उतारे थे। हत्यारोपी रेनू कनौजिया का कहना है कि ऐसा उन लोगों ने पीयूष के कहने पर किया था। पीयूष ने कहा था कि ज्योति को मौत के घाट उतारने के बाद तुम लोग उसकेजेवर उतार लेना।  हम अपहरण और लूट की बात कहकर पुलिस की जांच को भटका देंगे।
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