मानसून की बारिश में 12 फीसदी तक अनुमानित कमी के कारण इस साल देश में खरीफ की फसल प्रभावित हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून संकट गहराने का असर विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में खरीफ की फसलों पर पड़ेगा।
इसके साथ ही मौसम विभाग ने सोमवार को हिमालय की तराई में अगले चार दिनों में भारी बारिश की आशंका के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल में बाढ़ की चेतावनी भी जारी की है।
भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर ने कहा कि अब तक 10 फीसदी कम बारिश हुई है। इस सीजन के अंत तक कमी के 12 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में वर्षा में भारी कमी की भविष्यवाणी की गई है। हालांकि, अगले चार दिनों में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है लेकिन इसके बाद सूखे की स्थिति बनी रहेगी।
अब तक देश में 10 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने बचे हुए दो महीनों अगस्त और सितंबर में 16 फीसदी कम बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया है।
मौसम विभाग ने दी बाढ़ की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में 45 फीसदी, उत्तरी कर्नाटक के भीतरी क्षेत्रों में 45 फीसदी और पूर्वी उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में 36 फीसदी कम बारिश होने का अनुमान है।
मध्य महाराष्ट्र में 33 फीसदी और तेलंगाना में भी 23 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में 14 अगस्त तक पिछले साल के 863.61 लाख हेक्टेयर की तुलना में 890.82 लाख हेक्टेयर खरीफ फसलों की बुआई की गई है।
कोसी, गंडक, घाघरा में बढ़ सकता है जलस्तर
भारतीय मौसम विभाग भारतीय मौसम विज्ञान के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर ने कहा कि मानसून के कारण हिमालय के निचले क्षेत्रों में भारी से ज्यादा भारी बारिश होने की आशंका है।
इस बारिश से कोसी, गंडक, घाघरा और गंगा व ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ सकता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी की उच्चस्तरीय बैठक के बाद राठौर ने कहा कि इसके चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम के मैदानी क्षेत्रों और पश्चिम बंगाल के उप हिमालय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित होने वाले राज्यों को किसी भी आपात स्थिति में संबंधित संस्थाओं के संपर्क में रहने के लिए कहा गया है।