दो वर्ष पूर्व डोप में फंसे रंजीत महेश्वरी को अर्जुन अवार्ड दिए जाने पर हुई किरकरी के बाद खेल मंत्रालय सावधान हो गया है। इसका उदाहरण शुक्रवार को द्रोणाचार्य अवार्ड के चयन को हुई बैठक में देखने को मिला।
बैडमिंटन के पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन दीपांकर भट्टाचार्य की अगुवाई वाली कमेटी ने वेटलिफ्टिंग कोच श्यामला शेट्टी के नाम पर लाइफ टाइम द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए मुहर लगा दी थी, लेकिन अंतिम क्षणों में उनके नाम पर छानबीन करा ली गई।
कमेटी को जानकारी दी गई श्यामला नब्बे के दशक में बतौर खिलाड़ी डोप में पॉजिटिव पाई जा चुकी हैं। इसके बाद उनका नाम हटाकर एथलेटिक कोच हरबंस सिंह का नाम शामिल कर लिया गया।
कमेटी ने द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए पांच नामों की सिफारिश की है। खास बात यह है कि इनमें तीन नाम लाइफ टाइम अवार्ड के लिए हैं, जबकि होता इसके उलट है तीन को द्रोणाचार्य अवार्ड दिया जाता है और दो को लाइफ टाइम।
कमेटी तैराकी कोच निहार अमीन, हरबंस सिंह और बॉक्सिंग कोच एसआर सिंह के नाम की लाइफ टाइम के लिए जबकि पैरा एथलेटिक कोच नवल किशोर सोनीपत में चल रहे नेशनल कैंप में शामिल कुश्ती कोच अनूप सिंह के नाम की द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए सिफारिश की है।
28 कोचों ने द्रोणाचार्य और 25 ने लाइफ टाइम के लिए आवेदन किया था।
श्यामला शेट्टी नब्बे के दशक में जब बतौर खिलाड़ी डोप में फंसी थीं तब देश में वाडा से मान्यता प्राप्त कोई लैब नहीं थी। साथ ही नाडा भी अस्तित्व में नहीं आई थी।
तब साई की ओर से टेस्टिंग कराई जाती थी। नई पॉलिसी के तहत उसी को डोप पॉजिटिव माना जा रहा है जो वाडा या फिर नाडा की सैंपलिंग में फंसा हो। फिर श्यामला का कोई शिष्य भी पॉजिटिव नहीं था।