भारत में पहली बार दो बहनों को फांसी दी जाएगी। कोल्हापुर की इन औरतों पर 13 बच्चों को अगवा करने और 8 की हत्या के आरोप का आरोप है। राष्ट्पति प्रणब मुखर्जी ने पिछले महीने रेणुका किरण शिदें और उसकी बहन सीमा मोहन गोवित की दया याचिका ठुकरा दी।
टीओआई की खबर के मुताबिक राष्ट्रपति भवन में इस मामले पर निर्णय लेते हुए कहा गया कि शनिवार तक सारी कार्रवाई खत्म हो जाएगी।
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अब तक कितनों को हुई है फांसी
एक ओर महिलाओं को फांसी दिये जाने के संबध में विवाद है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के समय से 52 लोगों को फांसी दी गई थी, जबकि पीपुल्स यूनियन आफ सिविल लिबरटीज के अनुसार यह आंकडें कहीं अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1953 से 1963 के दौरान ही यह आंकडा़ 1422 का था जबकि महिलाओं को फांसी दिये जाने के सही तथ्य मौजूद नहीं हैं।
प्रणब मुखर्जी ने ठुकराई थी याचिका
रेणुका और सीता अपनी मां अंजनाबाई गोवित की मदद से बच्चों को अपहरण कर उनसें भीख मंगवाती थी। जब बच्चे उनके काम के नहीं रहते, तो उन्हें मार दिया जाता था। आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया। तीनों दोषियों को पुणे की यरवदा जेल में रखा गया है। ट्रायल के दौरान यरवदा जेल में आरोपी की मां की मृत्यु हो गई है।
राष्ट्पति ने राजेंद्र वासनिक की दया याचिका को भी नामंजूर कर दिया है। जिस पर वर्ष मार्च 2007 में तीन साल की नाबालिग के साथ्ा बलात्कार के बाद हत्या की थी।